वीडियो कॉल पर ‘गिरफ्तारी’ का डर दिखाकर लोगों से वसूली कर रहे ठग
क्या है डिजिटल अरेस्ट का पूरा मामला
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 अपराध।
डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराध का एक नया और खतरनाक तरीका है जिसमें ठग खुद को सीबीआई, ईडी, पुलिस या कस्टम अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर ‘गिरफ्तारी’ के डर में फंसा लेते हैं। ठग पीड़ित को बताते हैं कि उसके नाम से कोई अवैध पार्सल पकड़ा गया है, जिसमें ड्रग्स या मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा सामान मिला है, या उसका आधार और मोबाइल नंबर किसी आपराधिक मामले से जुड़ा है।
इसके बाद वो पीड़ित को वीडियो कॉल पर लगातार जोड़े रखते हैं और धमकी देते हैं कि अगर उसने कैमरे से आंख हटाई या किसी को बताया तो तुरंत गिरफ्तारी हो जाएगी। डर के माहौल में पीड़ित से बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली जाती है।
कैसे काम करते हैं ठग और हाल के मामले
हाल के महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां बुजुर्गों और रिटायर्ड अधिकारियों को निशाना बनाया गया। दिल्ली में एक बुजुर्ग दंपति से 14.85 करोड़ रुपये ठग लिए गए। ठगों ने दो एनजीओ समेत आठ बैंक खातों के जरिए पैसों को अलग-अलग रास्तों से घुमाकर ट्रेस करना मुश्किल बना दिया। मुजफ्फरपुर में एक रिटायर्ड बिजली अधिकारी से 17 लाख और लखनऊ में एक रिटायर्ड शिक्षक से 12.57 लाख रुपये इसी तरह ऐंठे गए।
ठग अक्सर व्हाट्सऐप वीडियो कॉल का इस्तेमाल करते हैं और फर्जी आईडी कार्ड दिखाते हैं। कुछ मामलों में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश भी बना लिए थे। पैसे को तुरंत क्रिप्टोकरेंसी या हवाला के जरिए बाहर भेज दिया जाता है, जिससे रिकवरी मुश्किल हो जाती है।
खुद को कैसे बचाएं
पुलिस का कहना है कि भारत में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती या पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती।
– किसी भी अज्ञात नंबर से आए वीडियो कॉल पर व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी न दें।
– डरने के बजाय तुरंत साइबर हेल्पलाइन *1930* पर शिकायत करें या नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन जाएं।
– अगर संदिग्ध कॉल आए तो फोन तुरंत काट दें और परिवार या पुलिस को सूचित करें।
साइबर पुलिस लगातार ऐसे रैकेट्स पर कार्रवाई कर रही है, लेकिन जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

