टिमरनी: ग्राम पंचायत में सरपंच पति का दबदबा: पहली बार बनी ग्राम पंचायत पांडर माटी में सरपंच सचिव ने धुंधले बिल वाउचर लगाकर फर्जी वेंडरो के नाम से निकाले लाखों, जिला पंचायत सीईओ बोली जांच दल बनाकर कार्यवाही करेंगे।
मकड़ाई समाचार हरदा। प्रदेश के मुखिया मोहन यादव के राज में पंचायतों में जमकर भ्रष्टाचार फल फूल रहा।
न नियम न कानून मनमर्जी से ग्राम पंचायत में आई हुई बिकास कार्यों के नाम की राशि का आहरण जिम्मेदार कर लाखों रुपए के बारे न्यारे कर रहे है।
ऐसा ही एक मामला जिले की टिमरनी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत पांडर माटी में देखने को मिला।पहली बार बनी नवीन ग्राम पंचायत में लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। अभी ढोंग गांव में भीषण जल संकट है। वही गांव में विकास कार्यों के नाम से ग्राम पंचायत के जिम्मेदार सरपंच सचिव फर्जी बिल वाउचर लगाकर विभिन्न मदो से हजारों लाखों रुपए के फर्जी बिल लगाकर अमानत में ख़यानत कर रहे है।
अभी वर्तमान में नवीन ग्राम पंचायत क्षेत्र में शासन द्वारा स्वीकृत लगभग 36 लाख रुपए की लागत से ग्राम पंचायत भवन बनने जा रहा है।
लेकिन यह निर्माण कार्य भ्रष्टाचार की भेट चढ़ता नजर आ रहा है।
गांव के एक गुर्जर समाज के समाजसेवी व्यक्ति ने अपनी जमीन दान में दी ताकि अच्छा ग्राम पंचायत भवन बन जाए। लेकिन गांव के सरपंच सचिव, मिलकर मनमाने तरीके उस निर्माण कार्य में फर्जी बिल वाउचर लगाकर राशि का आहरण कर रहे है। ऐसी स्थिति में उक्त भवन में निर्माण कार्य में जमकर भ्रष्टाचार होने से इंकार नहीं किया जा सकता।
गांव के लोगों सोचा था। की 36 लाख में ऐसा भव्य आलिशान पंचायत भवन बनेगा गांव के लोग सपना सजोए हुए बैठे थे। लेकिन जिस गति से ग्राम पंचायत का कार्य चल रहा। उससे ऐसा प्रतीत हो कि पंचायत भवन के निर्माण की जगह निजी स्वार्थ ज्यादा दिखाई दे रहा है।
नवीन पंचायत भवन के निर्माण कार्य में फर्जी बिल लगाकर निकाले लाखों, साढ़े 18 लाख की राशि निकाली , मौके पर 25 प्रतिशत हुआ काम !!
मकड़ाई एक्सप्रेस की टीम ने बीते दिनों ग्राम पंचायत भवन में चल रहे निर्माण कार्यों का जायजा लिया तो मौके पर देखा कि गांव की सरकारी स्कूल के सामने जिस जगह पंचायत भवन बन रहा। वह स्थान गड्ढे में है। उसमें बजरी भरकर जमीन से दो से तीन फुट की हाइट देना था। ताकि भविष्य में नाले का पानी पंचायत भवन के अंदर न भराएं।
वही मौके पर देखा तो जो कार्य हुआ है। उस हिसाब से साढ़े 18 लाख रुपए उस मद से निकल चुके मौके पर अभी 25 प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं हुआ।
धुंधले बिल लगाकर निकाले हजारों, एक ही व्यक्ति कभी बना मजदूर , कभी व्यापारी
ग्राम पंचायत के द्वारा कुछ वेंडरों के खाते में राशि का भुगतान किया गया है। राशि किस काम की दी गई। कितनी दी गई। इसमें पारदर्शिता नहीं है। उससे स्पष्ट होता है कि फर्जी वेंडर के खाते में राशि डाली गई है।
बिना जीएसटी बिल लगाए। बिल वाउचर पर सरपंच सचिव की हस्ताक्षर ओर सील भी नहीं लगी हुई है। और पंचायत के जिम्मेदारों ने, लाखों का भुगतान भी वेंडर को कर दिया। कुछ वेंडर तो ऐसे भी है। जो कभी पंचायत में मजदूर बने तो कभी उसी पंचायत में माल सप्लाई कर व्यापारी बने। मनमर्जी से लाखों रुपए नियम विरुद्ध तरीके से निकाले गए।
ग्राम पंचायत के जिम्मेदार सचिव विनोद कहार की कार्यशैली पर भी सवाल उठते है कि मनमाने ढंग से बिल वाउचर लगाकर लाखों रुपए का भुगतान कर दिया उन बिल वाउचर पर सरपंच सचिव की न तो सील लगी है। ओर नहीं हस्ताक्षर।
जबकि वेंडर ने अगर कोई बिल दिया है तो गांव का सरपंच सचिव दोनों उस बिल को देखते है। सामग्री कार्य का मूल्यांकन करने के बाद उस बिल वाउचर पर हस्ताक्षर और सील लगाकर भुगतान की प्रकिया को आगे बढ़ाते है। लेकिन इस ग्राम पंचायत में फर्जी वेंडरो से मनमाने महंगे दामों पर क्रय की गई सामग्री का भुगतान नियम विरुद्ध तरीके से करके शासन की राशि की बंदर वाट की गई। जिसको देखने वाला कोई नहीं है।
एक ही दिन कर दिया साढ़े दस लाख का भुगतान एक भी बिल पर सरपंच सचिव के हस्ताक्षर नहीं
ग्राम पंचायत में महिला सरपंच है। लेकिन काम सरपंच पति देखते है। ऐसे में ऐसी कौन सी जल्दी थी कि 36 लाख रुपए की लागत से बनने वाले पंचायत भवन में जो सामग्री लगना है। उसके लिए किसी भी दुकानदार से कोई कोटेशन नहीं बुलाया गया।
लगभग ढाई लाख रूपये की सामग्री टिमरनी के व्यापारी के यहां से खरीदी ओर उसको भुगतान भी एडवांस में कर दिया। जबकि अभी तक खरीदे गए सामान ग्राम पंचायत नहीं पहुंचा।
जब इस संबंध में सरपंच पति राजकुमार बड़ोदिया और सचिव ने बोलने से इंकार कर दिया और बोले हम नियम से ही काम कर रहे है।
जिला पंचायत सीईओ ओर जनपद पंचायत स्तर पर जांच टीम अगर निष्पक्ष जांच करती है। तो वित्तीय अनियमितता सामने आएगी। क्योंकि ग्राम पंचायत भवन का किए हुए कार्यों के मूल्यांकन से कई गुना अधिक राशि फर्जी वेंडर के खातों में डालकर निकाल ली गई है। जिससे शासन को लाखों रुपए का नुकसान होगा। और ये निर्माण भी भ्रष्टाचार की भेट चढ़ जायेगा।
जिन वेंडर के नाम पर लाखों का भुगतान हुआ। उन्होंने बिना जीएसटी के फर्जी फर्म के मनमाने बिल लगाकर राशि का आहरण किया हैं इसकी भी जांच होना चाहिए।
इनका कहना है।
आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है। हम जांच दल बनाकर निर्माण कार्य, और बिल वाउचर भुगतान की जांच करवाएंगे।
जांच में जो तथ्य सामने आयेंगे उस आधार पर संबंधित सरपंच सचिव के खिलाफ कार्यवाही करेंगे।
श्रीमती अंजली जोसेफ
सीईओ जिला पंचायत हरदा


