नीमच। भारतीय कृषि के इतिहास में ये संभवतः पहला अवसर है, जब देश का कोई जनप्रतिनिधि किसानों को ‘आत्मनिर्भर’ और खेती को ‘जहर मुक्त’ बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर इतना बड़ा बीड़ा उठा रहा है। रासायनिक खाद के बोझ और कर्ज के चक्रव्यूह में फंसे अन्नदाता को उबारने के लिए मध्य प्रदेश के नीमच जिले की जावद तहसील, देशव्यापी बदलाव का केंद्र बिंदु बनने जा रही है। पूर्व मंत्री और क्षेत्रीय विधायक ओमप्रकाश सखलेचा की अनूठी पहल पर 28 से 31 मार्च 2026 तक जावद में 04 दिवसीय ‘राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती शिविर’ का आयोजन होने जा रहा है।
इस महासंगम में ‘कृषि ऋषि’ कहे जाने वाले पद्मश्री डॉ. सुभाष पालेकर स्वयं मौजूद रहेंगे। वे कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश के कोने-कोने से आने वाले किसानों को ये समझाएंगे कि, कैसे बाजार के फंदे से निकलकर स्वाभिमान की खेती की जा सकती है। शिविर का मूल मंत्र ये है कि, एक किसान को अपनी खेती के लिए बाजार से एक रुपए की भी खाद या कीटनाशक खरीदने की जरूरत नहीं है। डॉ. पालेकर बताएंगे कि, सिर्फ एक देसी गोमाता के सहारे 10 से 15 एकड़ जमीन पर शून्य लागत (जीरो बजट) में भरपूर और विषमुक्त फसल कैसे की जा सकती है।
संसाधन आड़े न आएं, इसलिए विधायक ने की ठहरने-खाने की चिंता
अक्सर आर्थिक तंगी और संसाधनों का अभाव किसानों को ऐसे ज्ञानवर्धक आयोजनों से दूर कर देता है। इस पीड़ा को समझते हुए विधायक ओमप्रकाश सखलेचा ने एक मिसाल पेश की है। देश में अपनी तरह के इस पहले आयोजन में भाग लेने वाले प्रत्येक किसान के लिए आवास, नाश्ता और भोजन की व्यवस्था पूरी तरह निःशुल्क रखी गई है।

