नई दिल्ली. रेटिंग एजेंसी फिच सॉल्यूशंस ने 2020-21 में देश की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 4.6% से घटाकर 1.8% कर दिया है। इकोनॉमी पर कोविड-19 के असर को देखते हुए फिच ने अनुमान कम किया है। उसका कहना है कि बड़े पैमाने पर आय घटने से निजी खपत घटने की आशंका है। साथ ही कहा है कि तेल की कीमतों में कमी और कोविड-19 का संक्रमण बढ़ने की वजह से हम अलग-अलग देशों के जीडीपी ग्रोथ अनुमान में लगातार कमी कर रहे हैं। इसमें आगे भी कमी का अनुमान है। राहत पैकेज में ढिलाई से चिंताएं बढ़ेंगी
फिच सॉल्यूशंस का कहना है कि अनिश्चितताओं की वजह से इंडस्ट्री खर्चों में कमी कर रही है। इससे निवेश घटने की आशंका है। सरकार की ओर से राहत पैकेज में तेजी नहीं दिखाने के चलते अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ेंगी। फिच ने चीन की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 2.6% से घटाकर 1.1% किया है। उसका कहना है कि निजी खपत और एक्सपोर्ट घटने की वजह से ग्रोथ पर असर पड़ेगा। 60 साल में पहली बार 0% रह सकती है एशिया की ग्रोथ रेट: आईएमएफ
कोविड-19 की वजह से इस साल एशिया की आर्थिक विकास दर शून्य रह सकती है। यदि ऐसा हुआ तो यह पिछले 60 साल का सबसे खराब प्रदर्शन होगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पिछले हफ्ते यह आशंका जताई थी। साथ ही कहा था कि आर्थिक गतिविधियों के मामले में अन्य क्षेत्रों की तुलना में एशिया अब भी बेहतर स्थिति में है। फिर भी कोविड-19 का एशिया-प्रशांत क्षेत्र में गंभीर असर होगा।
चौधरी मोहन गुर्जर मध्यप्रदेश के ह्र्दयस्थल हरदा के जाने माने वरिष्ठ पत्रकार है | आप सतत 17 वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवायें देते आ रहे है। आपकी निष्पक्ष और निडर लेखनी को कई अवसरों पर सराहा गया है |