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गण गौर पर्व हमारी संस्कृति परम्पराओ का परिचायक गण गौर शिव शक्ति की आराधना का पर्व

पिछले 9 दिनों से गणगौर पर्व बड़ी ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ जिलेभर में  मनाया जा रहा है। यह पर्व न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी ऐतिहासिक और पौराणिक पृष्ठभूमि भी छिपी है, जिसे मैं आप सभी के साथ साझा करना चाहता हूँ। उम्मीद है कि आप सभी पूरे मन और उत्साह के साथ इस खास पर्व के बारे में विस्तार से जानें और इसे एक साथ मिलकर समझें।

गणगौर पर्व का महत्व और इतिहास

गणगौर, जिसे गौरी पूजा के नाम से भी जाना जाता है, मुख्य रूप से राजस्थान में मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिंदू त्योहार है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है, जिन्हें यहाँ रनुबाई और धनियर जी को गणगौर के रूप में पूजा जाता है। यह उत्सव चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है, जो इस वर्ष 31 मार्च 2025 को पड़ रहा है। मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त किया था और फिर उन्होंने सभी स्त्रियों को सौभाग्य का वरदान दिया।

यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। विवाहित महिलाएँ अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं, वहीं अविवाहित युवतियाँ मनचाहे वर की कामना के साथ माता गौरी की आराधना करती हैं। गणगौर का अर्थ “गण” (शिव) और “गौर” (पार्वती) से लिया गया है, जो प्रेम और वैवाहिक सौहार्द का प्रतीक है।

ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो गणगौर राजस्थान की रियासतों और शासकों की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा रहा है। पुराने समय में वीर योद्धा गणगौर को लूटने को अपनी शक्ति और शौर्य का प्रतीक मानते थे। आज भी जयपुर, उदयपुर, जोधपुर जैसे शहरों में शाही ठाठ-बाट के साथ गणगौर की सवारी निकाली जाती है, जिसमें लोक नृत्य, संगीत और रंग-बिरंगे परिधानों की छटा देखते ही बनती है।

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गणगौर की परंपराएँ:

इस पर्व की शुरुआत होली के अगले दिन से होती है और 16-18 दिनों तक चलती है। इस दौरान मिट्टी की गौरी और ईसर की मूर्तियाँ बनाई जाती हैं, जिन्हें सुंदर वस्त्रों और आभूषणों से सजाया जाता है। महिलाएँ पारंपरिक गीत गाती हैं, रंगोली बनाती हैं और मेहंदी लगाती हैं। अंतिम दिन मूर्तियों का जल में विसर्जन किया जाता है, जो माता पार्वती के अपने मायके से ससुराल लौटने का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान घेवर जैसे पारंपरिक मिठाइयाँ भी बनाई और बाँटी जाती हैं।

गणगौर का पर्व हमारी संस्कृति से पहचान कराता

हमें हमारी संस्कृति की गहराई और परंपराओं की सुंदरता से जोड़ता है। यह हमें एकता, प्रेम और समर्पण का संदेश देता है। मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि इस अवसर पर अपनी जिज्ञासा को बढ़ाएँ और इस पर्व के पीछे छिपे इतिहास व परंपराओं को समझने का प्रयास करें।आपके शहर गांव मे आयोजित गणगौर कार्यक्रमों में पूरे उत्साह के साथ अपने छोटे छोटे बच्चों के साथ शामिल हो ताकि हमारे बच्चे हमारी लोक संस्कृति परम्पराओ को समझे।

इस पावन अवसर पर आप सभी को गणगौर पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ! माता गौरी और भगवान शिव का आशीर्वाद आप सभी पर बना रहे। आपके जीवन में सुख, समृद्धि और प्रेम की बहार हमेशा खिलती रहे।