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घोर कलयुग ; 80 करोड़ की संपत्ति के मालिक की वृद्धाश्रम में मौत, बेटे-बेटी तक नहीं आए अंतिम यात्रा में

वाराणसी। भारतीय साहित्य और आध्यात्मिक जगत की प्रमुख हस्ती, पद्मश्री सम्मानित श्रीनाथ खंडेलवाल का निधन वृद्धाश्रम में हुआ। उनके पास लगभग 80 करोड़ रुपये की संपत्ति थी, लेकिन अंत समय में उन्हें परिवार की नहीं, बल्कि समाजसेवियों की देखभाल नसीब हुई। दुखद बात यह रही कि उनके बेटे और बेटी ने अंतिम दर्शन तक करने की ज़रूरत नहीं समझी।

साहित्य और अध्यात्म के समर्पित साधक

श्रीनाथ खंडेलवाल का नाम भारतीय साहित्य में सम्मान के साथ लिया जाता है। वर्ष 2023 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। उन्होंने अपने जीवनकाल में सौ से अधिक पुस्तकें लिखीं और अध्यात्म, दर्शन व भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में बड़ा योगदान दिया। उनके लेखन ने नई पीढ़ी को भारतीय मूल्यों से जोड़ने का काम किया।

परिवार ने छोड़ा, समाज ने अपनाया

स्रोतों के अनुसार, श्रीनाथ खंडेलवाल के दो बेटे और एक बेटी हैं, जो व्यवसाय और न्यायिक पेशे से जुड़े हुए हैं। बताया जाता है कि उन्होंने पिता की संपत्ति अपने नाम कराकर उन्हें वृद्धाश्रम में छोड़ दिया था। वृद्धाश्रम में श्रीनाथ जी की सेवा निःशुल्क की जा रही थी और वे अपने आखिरी दिनों में भी लेखन में सक्रिय रहे।

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अंतिम समय में अकेलापन और उपेक्षा

बीते सप्ताह तबियत बिगड़ने पर उन्हें ICU में भर्ती कराया गया, लेकिन परिवार से कोई मिलने तक नहीं आया। निधन के बाद जब वृद्धाश्रम प्रबंधन ने उनके बच्चों से संपर्क किया, तो उन्होंने व्यस्तता का हवाला देते हुए अंतिम संस्कार में आने से इंकार कर दिया।

समाजसेवियों ने उठाया अंतिम संस्कार का दायित्व

स्थानीय समाजसेवी अमन और उनके सहयोगियों ने चंदा एकत्र कर पूरी विधि-विधान से श्रीनाथ खंडेलवाल का अंतिम संस्कार कराया। इस दौरान शहर के साहित्यकारों और नागरिकों ने श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार की इस बेरुखी पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया।

समाज के लिए चेतावनी की मिसाल

यह घटना आधुनिक समाज में बढ़ते स्वार्थ, परिवारिक मूल्यों की कमी और बुजुर्गों की उपेक्षा का एक मार्मिक उदाहरण बन गई है। 80 करोड़ की संपत्ति के बावजूद श्रीनाथ खंडेलवाल को वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे सच्चे हकदार थे।समाजिक लोगो ने उनका साथ अन्तिम समय तक दिया मगर उनके खुद के बेटे बेटियो ने उपेक्षापूर्ण व्यव्हार किया।