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Harda News : 70 लाख गरीब आदिवासी के डकारने वाले मामले के तार मुख्य सरगना डिप्टी रेंजर सिंह से जुड़े, जीते जी शोषण किया, अब उनका पुत्र पटवारी कर रहा आदिवासियों का शोषण, कागजों में आदिवासी मालिक लेकिन कब्जा डिप्टी रेंजर के परिवार का,

 70 लाख रुपए आदिवासी के खाते से निकालकर खाने वाले वन विभाग का बाबू, गुंडा बाबू और पटवारी इस मामले में अब आया नया मोड़।

स्टाम्प पेपर ड्यूटी शुल्क की चोरी, आदिवासियों को गुमराह कर लाखो रुपए की मलाई डकारने वाले लुटेरों पर क्या प्रशासन करेगा। कार्यवाही।

जयश जिलाध्यक्ष राकेश काकोडिया बोले, आदिवासी समाज के ऊपर अन्याय अत्याचार नहीं सहेंगे। जिला कलेक्टर से मिलकर इस मामले की जांच करवाएंगे।

आदिवासी जोगी भोगी के खाते में 70 लाख रुपए आए। उसके खातों की जांच हो की किस किस के खाते में राशि ट्रांसफर हुई। और किस काम के पैसे उनके खाते में डाले गए। इस जांच से साबित हो जायेगा की कोन कोन अधिकारी दलाल इस लुटेरी गैंग से जुड़ा हुआ है।

70 लाख का क्या है मामला।

हरदा जिले के सावरी गांव में वर्ष 2017-18 में लोक वानिकी योजना के तहत खेत में लगे सागोंन के पेड़ो की कटाई हुई थी। उस समय उक्त भूमि पर गांव के ही कुछ आदिवासी समाज के लोगो का कब्जा था। लेकिन उक्त भूमि का पट्टा बैतूल जिले के लादी गांव के आदिवासी सुक्कन के नाम से था। वर्ष 2017-18 में ही में उसकी मृत्यु हो जाने के बाद उक्त भूमि उसके लड़के जोगी, भोगी और उसकी बहन लादी जिला बैतूल के नाम से रजिस्ट्री हो गई। हरदा जिले के ग्राम सावरी में उक्त भूमि पर पेड़ो की जब कटाई हुई तो ग्रामीण किसानो ने आपत्ति ली थी कि भूमि पर हमारा कब्जा है। इस पूरे मामले में अखबारों में खबरे भी चली थी कि मकड़ाई के जंगलों में करोड़ो की अवैध सागोन की कटाई हो रही है।

उसके बाद ग्रामीणों और वन विभाग के अधिकारियों के बीच बातचीत हुई थी कि पेड़ काटने के बाद जमीन किसानो को लौटा देंगे।

और कुछ राशि देने की बात हुई थी। लगभग पांच साल बाद जब अगस्त मई माह 2023 में जोगी, भोगी के खाते में 70 लाख रुपया वन विभाग उत्पादन से डाला गया।

लेकिन दुर्भाग्य कहे कि लुटेरे भ्रष्ट अधिकारियों और गुंडों ने मिलकर उन गरीबों को लूट लिया।

पैसा खाते में डलने के एक पखवाड़े बाद इन लुटेरों ने उस आदिवासी परिवार को गुमराह कर, डरा धमकाकर बैंक में जाकर उनसे जमा धन विड्राल करवा लिया ।

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हम आपको बता दे कि 70 लाख रुपए खाते में आने के बाद भी दोनो भाई दूसरो के खेतो में मजदूरी कर रहे है। बच्चे स्कूल नहीं जाते । घर पुराना कच्चा है। इन लुटेरों बेईमानो को उन पर जरा सा भी तरस नहीं आया। जब पैसा निकालना था तो चार पहिया वाहन बैतूल भेजकर उनको सम्मान शान के साथ लेकर आए और बैंक से पैसा निकाल लिया। और 70 लाख के मालिक को बस से बैतूल भेजा। इस प्रकार इस आदिवासी परिवार का शोषण हुआ है। इस संबंध में वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आदिवासी किसान के खाते में पैसा डाल दिया था।

इस खबर विडियो के माध्यम से मकड़ाई एक्सप्रेस, नवागत जिलाधीश महोदय से इस पूरे मामले की जांच करवाकर ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों और गुंडों पर कार्रवाई कर पीड़ित आदिवासी को न्याय दिलवाने की मांग करता है।

इधर सावरी के गरीब आदिवासी बोले वो जमीन हमारी थी।

डिप्टी रेंजर आर के सिंह और उसका पटवारी बेटे ने किया गुमराह , कार्यवाही की मांग की।

मामला क्या है 

जिले में दूरस्थ वनांचल ग्राम सांवरी में गरीब आदिवासी किसान परिवार की जमीन को वन अधिकारी द्वारा सरकारी योजना में अपने खास व्यक्ति का नाम राजस्व अभिलेख में दर्ज करा दिया था। जमीन के वास्तविक मालिकों सागौन कटाई के बाद जमीन लौटाने और जमीन वापिस करने का सब्ज बाग दिखाते रहें। आखिरकर सागौन की कटाई भी हो गई और अधिकारी और दलाल ने सागौन की राशि आदिवासी के बैंक खाते से अपने खातों में डलवा ली। इसके बाद आदिवासी परिवार जिसका वास्तविक हक था उसे आज भी अपनी जमीन से महरुम रखा गया है।

पूरा घटनाक्रम कुछ इस प्रकार है कि जिले की सिराली तहसील के ग्राम सांवरी जिसमे वर्ष 1980 पदस्थ डिप्टी रेंजर आरके सिंह ने गरीब आदिवासी किसान की भूमि में लगे सागोन के पेड़ को शासन की लोकवाणिकी योजना के तहत बेचने का प्रलोभन देकर किसान की भूमि को गांव के एक व्यक्ति सूक्कन के नाम राजस्व अभिलेख में दर्ज करवा दी।
इसके बाद जमीन के वास्तविक मालिक सुखराम पिता बाटू,विश्राम पिता बाटू,श्रीमति सिटूबाई पुत्री बाटू, रमता बाई पूत्री बाटू ,शिवराम पिता टोंगे जाति कोरकू, मूंगा पिता टोंगे,मंगल पिता टोंगे सभी जाति कोरकू निवासी ग्राम सांवरी ने इस मामले की शिकायत भी की थी और यह मामला लोगो में चर्चा का विषय भी बना था। इन लोगो ने अपनी शिकायत में बताया कि पिता बाटू की कृषि भूमि ग्राम सांवरी खसरा नं 29,37,51,103,196 योग रकवा 13,95 एकड रही है। हमारी मां जांगोबाई पुत्री रिमाय की कृषि भुमि खसरा नं 3,29,49,199 योग रकबा करीब 16,50 एकड स्थित ग्राम सांवरी मे है । इसी के साथ आदिवासी टोगे की भुमि 175.2 रकबा 5,00 एकड स्थित ग्राम सांवरी में रही है।
उक्त आवेदको ने बताया कि हमारे गांव में निवर्तमान डिप्टी रेंजर आरके सिंह जो वर्ष 1980 में पदस्थ थें। इन्होने हमारे पिता अनपढ़ और सीधेपन का फायदा उठाया और हमारी भूमि में लगे सागौन के पेडो को शासन की योजना अनुसार कटवाने के लिए डिप्टी रेंजर ने अपने व्यक्ति मदराम पिता जोल्ला के नाम पर विक्रयपत्र बनवाया। जिसकी कोई राशि हमें नही दी गई थी।

हमारे पिता को मौखिक रुप से बताया गया था कि आपकों को इसका लाभ दिया जायेगा। सागौन कटाई के बाद जमीन वापिस कर दी जायेगी। इस प्रकार की सांठगांठ और फर्जी दस्तावेज तैयार कर वर्ष 1980 मे मदराम पिता जोल्ला के नाम पर हमारी कृषि भूमि का अंतरण हो गया था। कागजी कार्यवाही में मदराम पिता जोल्ला का नाम दर्ज हो गया। बावजूद इसके उक्त भूमि पर हमारा ही कब्जा है। जब यह सब कागजी कार्यवाही की गई थी तब हम आवेदक गण नाबालिग थें। हमारी जमीन के खरीददार क्रेता मदराम एवं विकेता टोंगे तथा बाटू एवं जागोबाई की मौत हो गई उसके पश्चात क्रेता मदराम के पुत्र सुक्कन का नाम राजस्व अभिलेख मे दर्ज हो गया वर्ष 2017 मे हमारे खेत मे सागौन के पेड काटने आये थे। आरके सिंह रिटायर्ड डिप्टी रेन्जर भी आये और हमे कहा की पेड कटने के बाद तुम्हारी जमीन तुम्हे वापस कर दी जाएगीं।

लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जानकारी से पता हुआ की यह जमीन हमे वापस नही करेंगे।जो हमने न्यायालय मे आपत्ति ध् दावा पेश किया था हमे पता चला की लकडी कटाई के उपरांत वर्ष 2017.18 मे सुक्कन की भी मृत्यू हो गयी इसके उपरांत आर के सिंह रिटायर्ड डिप्टी रेन्जर के पुत्र दिनेश सिंह जो कि पटवारी है उन्हौने सुक्कन के पुत्र जोगी एवं भोगी का नाम भूमि राजस्व अभिलेखो मे दर्ज करा लिया गया।
यह कि जोगी एवं भोगी पिता सुक्कन के द्वारा न्यायालय में आपत्ति दावा पेश किया गया दावे मे यह बताया गया कि यह भूमि हमारे पिता की हैएजब यह मामला न्यायालय चल रहा था उस दौरान हम आवेदकगणों का एक बार फिर फायदा उठाते हुए जमीन आवेदकगणो के नाम वापस करने के लालच देकर जोगी एवं भोगी पिता सुक्कन से आपसी सहमति का राजीनामा हुआ जिसमे यह तय हुआ की सागौन के पेड की जो भी राशि शासन से जोगी एवं भोगी पिता सुक्कन को प्राप्त होगी उस राशि मे से हम आवेदकगणो को अपना हिस्सा दिया जावेगा और हमारी कृषि भूमि का विक्रयपत्र हम आवेदकगणो के नाम निष्पादित किया जावेगा । जिसका पंजीयन शुल्क भी सुक्कन पुत्र जोगी एवम भोगी ही वहन करेंगे।

कुछ विश्वसनीय एवम ग्राम के लोगो से जानकारी प्राप्त हुई है की जोगी और भोगी पिता सुक्कन डिप्टी रेंजर आर के सिंह के पुत्र दिनेश सिंह के साथ मिलकर उक्त भूमि को किसी और व्यक्ति को बेचना चाहते है तथा हमारी कृषि भूमि को हपड़पना चाहते है।

महोदय जी हमारी ज़मीन पर लगे सागोन के पेड़ का भुगतान शासन द्वारा जोगी एवम भोगी पिता सुक्कन को कर दिया गया हैएजोगी और भोगी एवम कुछ अन्य लोगो के द्वारा राशि को खाते से निकल लिया गया है। अब वो लोग हमे हमारा हिस्सा नही दे रहे है। हमारी कृषि भूमि जो हमारे जीवन यापन का एकमात्र सहारा है उसे भी जोगी और भोगी पिता सुक्कन किसी अन्य व्यक्ति को बेचना चाह रहे है।हमारा प्रशासन से निवेदन है कि मामले में हमे उचित न्याय दिया जाए। हमारी जमीन संबधित किसी भी तरह के नामांतरण और सौंदे संबधित कार्य को रोका जाए।

अगले अंक में पड़े , वन विभाग के बाबू की आय से अधिक संपत्ति,  पटवारी के पास कहा से आई करोड़ो की जमीन,