इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर में 1 अगस्त से लागू ‘नो हेलमेट, नो पेट्रोल’ अभियान को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में लगी दो जनहित याचिकाओं पर सोमवार, 4 अगस्त 2025 को सुनवाई पूरी हो गई। कोर्ट ने दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए हेलमेट पहनने की अनिवार्यता पर जोर दिया। कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया है।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट रितेश ईनानी और एडवोकेट पंकज वाधवानी ने अपनी याचिकाओं में कहा है कि शहर के बाहरी इलाकों में हेलमेट अनिवार्य किया जा सकता है, लेकिन मध्य क्षेत्र में इसकी कोई जरूरत महसूस नहीं होती है। उनका तर्क है कि शहर के मध्य में वाहनों की अत्यधिक भीड़ के कारण ट्रैफिक धीमी गति से चलता है, जिससे दुर्घटना की संभावना कम होती है।
कलेक्टर को हेलमेट वितरण का प्रस्ताव
भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा और महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कलेक्टर आशीष सिंह से मुलाकात की। उन्होंने आग्रह किया कि जिस तरह इंदौर में स्वच्छता के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया था, उसी तरह हेलमेट पहनने के लिए भी लोगों को जागरूक किया जाए। भाजपा नेताओं ने सामाजिक संगठनों के माध्यम से जागरूकता और हेलमेट वितरण कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा।
98% तक कम होगी मौतों की संख्या
परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह के मुताबिक, हर बात कानून में नहीं होती, लेकिन अपनी जान बचाने के लिए लोगों को खुद से हेलमेट पहनना चाहिए। उन्होंने कहा कि हेलमेट दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को 98 प्रतिशत तक कम कर सकता है और यह लोगों को सुरक्षित रखने का एक महत्वपूर्ण साधन है।

