jhankar
ब्रेकिंग
शराब दुकान पर मिलावट वीडियो के बाद हड़कंप, आबकारी विभाग दो दिन से कर रहा जांच 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों के आधार कार्ड बनवाएं आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम के तहत विभिन्न गतिविधियों का हुआ आयोजन अनुसूचित जाति जनजाति संगठनों के कार्यकर्ताओं ने बाबा साहेब की मूर्ति लगाने के लिए एसडीएम को सौंपा ज्... प्रवासी मजदूर के दिव्यांग बच्चे को मिली निःशुल्क ट्राईसिकल खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने जलाराम किराना से लिया सोयाबीन ऑयल का नमूना खुशियों की दास्तां : पीएमएफएमई योजना से आत्मनिर्भर बने खिरकिया के युवा उद्यमी देवेश मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत 4 अक्टूबर को मगरधा में लगेगा शिविर 2 अक्टूबर को कृषि उपज मण्डी में नीलामी कार्य बंद रहेगा आज का सुविचार - MakdaiExpress24

राजधानी दिल्ली में बढ़ता वायुप्रदूषण बन रहा युवाओं के लिए काल, बढ़े कैंसर के मामले

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली से कैंसर को लेकर एक बेहद डरावनी और चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। दिल्ली सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक कैंसर अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। बीते दो दशकों (20 साल) में दिल्ली में कैंसर से जान गंवाने वाला हर तीसरा व्यक्ति 44 वर्ष से कम उम्र का था। यह डरवाने आंकड़े बताते हैं कि कामकाजी युवा आबादी जानलेवा बीमारी की चपेट में तेजी से आ रही है।

दरअसल बीते 20 वर्षों में दिल्ली में कुल 1.1 लाख लोगों की मौत कैंसर से हुई। 2005 में कैंसर से होने वाली मौतें जहां 2,000 के करीब थीं वहीं 2024 में यह बढ़कर 7,400 तक पहुंच गई हैं। दिल्ली में कैंसर से होने वाली मौतों की दर (7प्रतिशत) जनसंख्या वृद्धि दर से तीन गुना ज्यादा है। कुल मौतों में से लगभग 93,000 मौतें अस्पतालों में दर्ज की गईं जो दर्शाता है कि लोग इलाज के लिए पूरी तरह अस्पतालों पर निर्भर हैं।

- Install Android App -

कैंसर का सबसे डरावना पहलू युवाओं और बच्चों में इसका बढ़ता ग्राफ है। दिल्ली में हुइ कुल मौतों में करीब 8 प्रतिशत हिस्सेदारी बच्चों की रही। पिछले 20 साल में 7,298 बच्चों ने दम तोड़ा। वहीं 15-24 साल के युवाओं में 5,415 मौत दर्ज की गई। जबकि सबसे ज्यादा प्रभावित 45 से 64 वर्ष की उम्र के लोग का प्रतिशत 41 रहा। वहीं जेंडर के आधार पर पुरुषों में मृत्यु दर महिलाओं की तुलना में अधिक रही।

दिल्ली एम्स के डॉ. अभिषेक शंकर के अनुसार कैंसर बढ़ने के दो मुख्य कारण हैं। दिल्ली की जहरीली हवा फेफड़ों के साथ-साथ ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को बढ़ा रही है। निजी अस्पताल बहुत महंगे हैं और सरकारी अस्पतालों में मरीजों का भारी दबाव है। इस कारण कई बार मरीज को सही समय पर कीमोथेरेपी या रेडिएशन नहीं मिल पाता। युवाओं में कैंसर न केवल बढ़ रहा है बल्कि यह ज्यादा एग्रेसिव (तेजी से फैलने वाला) होता जा रहा है।