देहरादून। उत्तराखंड के हरिद्वार में मनसा देवी मंदिर में भारी भीड़ के कारण भगदड़ हुई जिसमें छह लोगों की मौत हो गई है। मंदिर के महंत रविंद्र पुरी ने कहा कि हादसा बिजली के तार टूटने से नहीं बल्कि भीड़ में किसी के फिसलने से हुआ। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने हादसे की जिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया और पीड़ितों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
उत्तराखंड स्थित मनसा देवी ट्रस्ट मंदिर रविवार को फिर से खोल दिया गया है। वहीं ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने उन खबरों को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि हादसा बिजली का तार टूटने की अफवाह के चलते हुआ है। उनका कहना था कि भगदड़ मंदिर के अंदर किसी के फिसलकर गिरने की वजह से मची है। रविवार को सुबह हरिद्वार में स्थित इस मंदिर में हुई भगदड़ में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई है जबकि 45 लोग इसमें घायल हैं। मृतकों में चार उत्तर प्रदेश, एक बिहार और एक उत्तराखंड का निवासी है।
राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र ने बताया कि इस घटना में पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और 23 अन्य को मामूली चोटें आई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार के जिला अस्पताल का दौरा किया और घायलों से मुलाकात की। घायलों का इलाज चल रहा है और कुछ को एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया है। सरकार के अनुसा उसकी प्राथमिकता है घायलों को अच्छा इलाज मुहैया कराने की है ताकि वो जल्द ठीक हो जाएं. एक टोल-फ्री नंबर भी जारी किया गया है। सीएम धामी ने कहा कि मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए गए हैं और मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की भी घोषणा की गई है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर, हरिद्वार के जिला मजिस्ट्रेट को घटना की मजिस्ट्रेटी जांच करने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा, सीएमओ ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा की जा रही है। सीएम धामी ने कहा, ‘एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई है जिसमें मनसा देवी मंदिर में एक अफवाह के कारण मची भगदड़ में छह लोगों की मौत हो गई है और कई अन्य घायल हो गए हैं। मजिस्ट्रेट की जांच के आदेश दे दिए गए हैं, घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है और बचाव अभियान जारी है जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. पीड़ितों की मदद के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।’

