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हंगामे के बीच शुरू हुआ एमपी का बजट सत्र, एमपी को 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र पहले ही दिन शोर-शराबे और राजनीतिक टकराव के बीच शुरू हुआ। सत्र की औपचारिक शुरुआत राज्यपाल मंगू भाई पटेल के अभिभाषण से हुई। करीब 26 मिनट के संबोधन में उन्होंने सरकार की उपलब्धियों और आगामी लक्ष्यों का खाका पेश किया, लेकिन बीच-बीच में विपक्ष के विरोध और नारेबाजी से सदन का माहौल गरमाता रहा।

राज्यपाल का अभिभाषण
राज्यपाल ने कहा कि देश “अमृत काल” की दहलीज पर खड़ा है, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकल्प व्यक्त किया है। उन्होंने उद्योगों के अनुकूल वातावरण, भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, वर्ष 2047 तक मध्य प्रदेश को 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य और 2026 को ‘कृषि वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा का उल्लेख किया।

अभिभाषण में पीएम जनमन योजना के तहत 1.35 लाख आवास निर्माण, उज्जैन में शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के प्रयास और नई शिक्षा नीति के तहत किए गए सुधारों का भी जिक्र किया गया।

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विपक्ष का विरोध
अभिभाषण के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हस्तक्षेप करते हुए आरोप लगाया कि नल-जल योजना और इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों जैसे गंभीर मुद्दों को भाषण में शामिल नहीं किया गया। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे के बावजूद राज्यपाल ने अपना अभिभाषण पूरा किया। राज्यपाल के प्रस्थान के बाद सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई, जहां विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जो अंश पढ़ा नहीं जा सका, उसे पढ़ा हुआ माना जाएगा। इसके बाद सदन की कार्यवाही अगले दिन तक स्थगित कर दी गई।

कर्ज पर सियासत तेज
बजट सत्र के साथ ही प्रदेश के बढ़ते कर्ज को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि बजट जनता केंद्रित होना चाहिए, न कि कर्ज आधारित। वहीं भाजपा की ओर से प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और विधायक पन्ना लाल शाक्य ने पलटवार करते हुए कहा कि लिया गया कर्ज विकास और जनकल्याण योजनाओं पर खर्च हो रहा है। शाक्य ने बयान दिया कि “जिसके पास घी है वह घी पी रहा है, जिसके पास पानी है वह पानी पिए” विधायक का ये बयान सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।

सत्र का एजेंडा
16 फरवरी से शुरू हुआ यह सत्र 6 मार्च तक चलेगा. कुल 3478 प्रश्नों की सूचनाएं दी गई हैं। 236 ध्यानाकर्षण, 10 स्थगन प्रस्ताव, 41 अशासकीय संकल्प और शून्यकाल में 83 प्रश्न सूचीबद्ध हैं। इधर कांग्रेस ने विधायक दल की बैठक में रणनीति तय की है, वहीं भाजपा भी समन्वय बैठक कर जवाबी तैयारी में जुटी है। अब नजर इस बात पर है कि यह बजट सत्र हंगामे से आगे बढ़कर जनता के मुद्दों पर कितनी गंभीर चर्चा कर पाता है।