अधिकारियों के लिए औपचारिकता बनी जनसुनवाई, समय पर नहीं आते अधिकारी, पीड़ितों का भी मोहभंग! 6 शिकायती आवेदन आए
➡️ के के यदुवंशी पत्रकार,
सिवनी मालवा। जनपद पंचायत कार्यालय में हर मंगलवार को जनसुनवाई जिला प्रशासन ने इस उद्देश्य के साथ शुरू की गई थी कि सभी विभाग एक जगह मौजूद रहें और पीडितों को मौके पर ही समाधान भी मिले अब हर मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई महज एक औपचारिकता बनकर रह गई है। अधिकांश विभाग के अधिकारी जनसुनवाई को लेकर कितने गंभीर हैं इसका पता इससे चलता है कि जनसुनवाई में एक अधिकारी ही मौजूद हैं वहीं कई अधिकारी नहीं आए थे और उन्होंने अपने प्रतिनिधि को भेजा था विभागों के अधिकारी हर बार की तरह नदारद थे दो-तीन विभागों ने खानापूर्ति करने के लिए कर्मचारियों को वहां बैठा दिया जिससे हाजिरी लग गए। जबकि इन कर्मचारियों के पास खुद किसी भी तरह का निर्णय लेने या फरियादी की शिकायत का समाधान करने का अधिकार ही नहीं है। ऐसे लचर प्रशासनिक रवैये का ही परिणाम है कि अब पीडितों का भी जनसुनवाई से मोह भंग होने लगा है।
पहले जहां जनसुनवाई में लंबी-लंबी कतारें लगती थीं वहीं अब गिने-चुने आवेदक ही पहुंचे। पीडितों को भी अब पता है कि जनसुनवाई महज आवेदन देने की औपचारिकता रह गई है। यहां अधिकारी एक मिनट समस्या सुनते हैं और आवेदन जमा करने की बात कहकर चलता कर देते हैं। मंगलवार को जनसुनवाई में छह आवेदन आए राजस्व विभाग के दो जनपद पंचायत एक पुलिस विभाग दो सिंचाई विभाग एक शिकायत विभाग प्रमुख को पहुंचाएं जाएंगे
सिवनी मालवा। जनपद पंचायत कार्यालय में हर मंगलवार को जनसुनवाई जिला प्रशासन ने इस उद्देश्य के साथ शुरू की गई थी कि सभी विभाग एक जगह मौजूद रहें और पीडितों को मौके पर ही समाधान भी मिले अब हर मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई महज एक औपचारिकता बनकर रह गई है।
अधिकांश विभाग के अधिकारी जनसुनवाई को लेकर कितने गंभीर हैं इसका पता इससे चलता है कि जनसुनवाई में एक अधिकारी ही मौजूद हैं वहीं कई अधिकारी नहीं आए थे और उन्होंने अपने प्रतिनिधि को भेजा था विभागों के अधिकारी हर बार की तरह नदारद थे दो-तीन विभागों ने खानापूर्ति करने के लिए कर्मचारियों को वहां बैठा दिया जिससे हाजिरी लग गए। जबकि इन कर्मचारियों के पास खुद किसी भी तरह का निर्णय लेने या फरियादी की शिकायत का समाधान करने का अधिकार ही नहीं है। ऐसे लचर प्रशासनिक रवैये का ही परिणाम है कि अब पीडितों का भी जनसुनवाई से मोह भंग होने लगा है।
पहले जहां जनसुनवाई में लंबी-लंबी कतारें लगती थीं वहीं अब गिने-चुने आवेदक ही पहुंचे। पीडितों को भी अब पता है कि जनसुनवाई महज आवेदन देने की औपचारिकता रह गई है। यहां अधिकारी एक मिनट समस्या सुनते हैं और आवेदन जमा करने की बात कहकर चलता कर देते हैं। मंगलवार को जनसुनवाई में छह आवेदन आए राजस्व विभाग के दो जनपद पंचायत एक पुलिस विभाग दो सिंचाई विभाग एक शिकायत विभाग प्रमुख को पहुंचाएं जाएंगे

