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सारंगपुर : 24 साल से जीवाजीपुरा गांव में सरकारी योजनाओं से वंचित

सारंगपुर। सारंगपुर शहर से महज 5 किलोमीटर दूरी पर बसा जीवाजीपुरा गांव आज भी सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से कोसों दूर है। कालीसिंध नदी किनारे बसे इस गांव में लगभग 29 परिवारों के 200 से अधिक लोग गरीबी और लाचारी की जिंदगी जी रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि आजादी के सात दशक बाद भी लोग पक्के मकान का सपना देखने को मजबूर हैं। लोग अब भी जीवन घासफूस की टपरियों में ही बिता रहे हैं।

ग्रामीण बताते हैं कि 24 साल पहले तहसीलदार यहां आए थे, इसके बाद गांव तक कोई अधिकारी नहीं आया। 2021 की बाढ़ में जब पूरा गांव डूब गया और लोग त्रिपाल के नीचे आसरा लगाकर बैठे थे। तब तत्कालीन तहसीलदार अनीता पटेल ने उन्हें बालोडी में बसाने का निर्णय लिया था। कुछ परिवारों को तो पट्टे मिले, लेकिन 29 परिवार आज भी उसी जगह फूस की टपरियों में जिंदगी काट रहे हैं।

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कागजों में सड़क, हकीकत में कीचड़
गांव का रास्ता आज भी कागजों में ही दर्ज है। असलियत यह है कि यहां पहुंचने के लिए लोगों को झाडियों और कीचड भरे रास्ते से गुजरना पडता है। गांव में न आंगनवाडी है, न स्वास्थ्य केंद्र, न कोई सरकारी इमारत। सिर्फ एक प्राइमरी स्कूल और एक हैंडपंप ही जीवन की डोर थामे हुए हैं।

टूटी उम्मीदें, अधूरा सपना
प्रधानमंत्री आवास योजना का नाम तो ग्रामीणों ने सुना है, लेकिन उसका लाभ उन्हें कभी नहीं मिला। 90 वर्षीय केशरबाई, सुगनबाई, प्रेम सिंह, दशरथ और कमलनाथ जैसे बुजुर्ग ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार पक्के घर और पुनर्वास की गुहार लगाई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। हमने अपने बच्चों को फूस की टपरियों में पाला-पोसा, अब बुढापे में भी यही आस है कि सरकार हमें एक छत दे दे। आंसुओं से भीगी आवाज में ग्रामीणों ने कहा।

प्रशासन का आश्वासन
जनपद सीईओ सारंगपुर हेमेंद्र गोविल का कहना है कि वे मामले की जांच कर पात्र ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास करेंगे। वहीं एसडीएम रोहित बम्होरे ने भी जल्द ही स्थिति सुधारने का भरोसा दिया है।