भोपाल। मप्र भारत में एक ऐसा राज्य है जहां शिक्षा की व्यवस्थाएं चरमरा रही हैं। शिक्षा जरूरी नहीं है प्राइवेट स्कूलों में व्यवस्थाओं और सुविधाओं की आड़ में इस बार सरकार ने अच्छा राजस्व वसूला।जिससे 20 से 25 वर्षों से चल रहे स्कूलों में ताला लग गया। जिन सरकारी स्कूलों में बच्चे पढ़ना नहीं चाहते थे उन्हें वहीं पढ़ने पर मजबूर किया जा रहा है। मप्र के स्वयं के 80 प्रतिशत सरकारी स्कूलों की सुविधा शून्य है। सी एम राइज स्कूलों की आड़ में भ्रष्टाचार चल रहा है। जिसकी सामने ही दो दिन पूर्व मप्र के सिवनी जिले केवलारी ब्लॉक की सी एम राइज स्कूल की छत गिरने से 12 लोगों को गंभीर चोट आई।
शैलेष तिवारी प्रदेश अध्यक्ष मप्र प्राइवेट स्कूल वेलफेयर संचालक मंच ने कहा कि तीन तीन साल से निः शुल्क शिक्षा अधिकार अधिनियम आर टी ई के प्राइवेट स्कूलों में फ्री पढ़ रहे बच्चों का भुगतान नहीं किया जा रहा है। 2016 से 2022 तक 7 वर्षों में आर टी ई के लाखों बच्चों का अलग पैसा रुका हुआ है। ज्ञापन निवेदन किया तो अधिकारी कहते है कि यह पैसा भूल जाओ। क्या वह अपनी मेहनत की तंखा भूल जाएंगे।
मप्र में तो अब ऐसी पॉलिसी प्रत्येक वर्ष बन रही हैं कि अब यह सरकार निः शुल्क शिक्षा अधिकार आर टी ई के बच्चों के प्रवेश कम ले रही है और उसमें भी छटनी कर देती है। जिससे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति व कमजोर परिवार के बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। आर टी ई भुगतान आया और स्कूलों की जांच प्रारंभ हो जाती है। पहले जांच क्यों नहीं करते है। जांच परेशान करने का एक जरिया है जिससे भुगतान ओर विलंब से क्या जा सके। राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल बैंक के ब्याज का लाभ ले सके।
आर टी ई बच्चों का चयन सरकार के अधिकारी कर प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश कराते हैं। अधिकारी को नोडल को चाहिए । स्कूल सत्र में निरीक्षण करे कि वह बच्चे से फीस तो नहीं ली जा रही हैं वह बच्चा स्कूल आ रहा है या नहीं। उसका नाम दाखिल या हाजरी पंजी में है कि नहीं या सीधे उनके अभिभावक से फोन में बात करें। जिनके नंबर सरकार के पास रहते है। हम प्राईवेट स्कूलों को क्यों परेशान किया जाता हैं। जबकि हम बिना भेदभाव ओर ईमानदारी से बच्चों को शिक्षा देते है।
फिर बेकार में जांच क्यों की जाती है।
प्रत्येक जिले 2023 – 24 दो वर्ष पहले फीस भुगतान का स्कूल द्वारा प्रपोजल लॉक हो गया था। लेकिन कछुए की चाल से चल रहे शिक्षा विभाग में अटका है पड़ा है। जब भुगतान की बात आती है तब जाकर नींद खुलती है प्रत्येक स्कूल में नोडल जाकर चेक करेगा। कई बार दो दो बार चेक होता है। फिर कई बार बी आर सी द्वारा भी चेक किया जाता है फिर जिला डी पी सी द्वारा भी जांच कराई जाती है फिर जिला पंचायत फाइल जाती है उसमें भी रेंडम जांच की जाती हैं। फिर कलेक्टर महोदय जी के पास फायनल होने जाती है। उनका मूड सही रहा तो ठीक नहीं तो फिर से पूरे स्कूलों की जांच की जाती है।
यह क्या मजाक है।
वास्तव में यह प्रणाली ओर प्रक्रिया सरकार सभी कार्यों में ईमानदारी से करे तो मप्र भ्रष्टाचार मुक्त होगा। सभी कार्यों में गुणवत्ता आयेगी। लेकिन ऐसा नहीं होगा।
हम प्राईवेट स्कूल इसी सिस्टम से परेशान है कि भुगतान के समय ही यह जांच क्यों। सत्र के बीच जांच कर लिजिए। राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल को हम फ्री में एक सलाह देंगे कि पिछले सत्र 2024 – 25 की जांच नोडल से लेकर माननीय कलेक्टर महोदय की जांच इसी सत्र के नवंबर दिसंबर तक एक बार नहीं कई बार कराकर अभी रख लीजिए।
भुगतान के समय सीधे भुगतान कीजिए।
पिछले दो वर्ष 2023 – 24 का पैसा अब जाकर दे रहे है जो राजपत्र अधिनियम के विपरीत है पर कोई क्या कर सकता है। हमारा मेहनत का हमारे अधिकार का छः से सात सो करोड़ साल में एक बार देना है। लेकिन सरकार को हमारी मेहनत की चिंता नहीं है सरकार को तो अपना वोट बैंक लाड़ली लक्ष्मी योजना ओर भी वोट से जुड़ी योजना के भुगतान में विलंब नहीं होता है। उसके लिए तो कर्ज लेकर समय पर भुगतान होता है।
हम प्राईवेट स्कूलों के साथ यह भेदभाव क्यों हो रहा हैं।
दो माह से सुन रहे है कि माननीय मुख्यमंत्री जी वन क्लिक से हमारे दो साल पहले का आर टी ई का भुगतान करेंगे। लेकिन कलेक्टर जांच के कारण लेट हो रहा है कि यह भी भुगतान नहीं करने की सरकार की कोई पॉलिसी है। राखी निकल गई आज से नवरात्रि पर्व प्रारंभ हो गया और दिवाली आने वाली है। घर में बैठे रहे तो अगले वर्ष भी हमारा आर टी ई भुगतान नहीं होगा। इसलिए मप्र के प्राइवेट स्कूल 24 सितंबर 2025 को भोपाल पहुंच रहे हैं। उनका साथ देने मप्र प्राइवेट स्कूल वेलफेयर संचालक मंच संगठन भी पहुंच रहा है। हम पैसा लेकर ही वापस आयेंगे। हमने अपनी यह समस्या स्थानीय विधायक जी और सम्माननीय मंत्रियों को भी अवगत कराया है देखते है कि अपने क्षेत्रों के स्कूलों के लिए यह क्या करते हैं।

