jhankar
ब्रेकिंग
कमर्शियल सिलेंडर बंद, इंदौर में लकड़ी और कंडों से बनेगा शादी का खाना मैहर में दौड़ती स्लीपर बस में लगी भीषण आग, ड्राइवर-कंडक्टर ने कूदकर बचाई जान एमपी में पीपी बैग की कमी से गेहूं खरीदी पर संकट, 1 अप्रैल से शुरू होगी प्रक्रिया इंदौर में घरेलू गैस सिलेंडर के लिए 25 दिन का इंतजार, कमर्शियल सप्लाई बंद मध्य प्रदेश में 200 गांवों का एरियल सर्वे शुरू, जमीन का मिलेगा पक्का मालिकाना अधिकार लाइन बिछी पर पानी नहीं आया: भागीरथपुरा में बढ़ा जल संकट Aaj Ka Rashifal: आज दिनांक 11 मार्च 2026 का राशिफल, जानिए आज क्या कहते है आपके भाग्य के सितारे धर्मध... नर्मदापुरम: धरमकुंडी ब्रिज पर भीषण सड़क हादसा, अनियंत्रित बाइक डिवाइडर से टकराई, युवक की मौत भोपाल में गंदे पानी की सप्लाई से हड़कंप, नलों से निकल रहे कीड़े शराब के नशे में युवक ने लहराया असलहा, बगल से गुजर रही युवती को लगी गोली, मौत

दिल्ली में आतंकी फंडिंग नेटवर्क का भंडाफोड़

जम्मू। जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) इकाई ने दिल्ली के लाजपत नगर में एक बड़े आतंकी फंडिंग नेटवर्क (Terror Funding Network) का पर्दाफाश किया है। इस हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन में दिल्ली पुलिस के सहयोग से दो कश्मीरी नागरिकों, मोहम्मद अयूब भट और मोहम्मद रफीक शाह को गिरफ्तार किया गया है। दोनों प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए वित्तीय सहायता जुटाने में शामिल थे।

- Install Android App -

लश्कर-ए-तैयबा के लिए फंडिंग
जम्मू-कश्मीर पुलिस के प्रवक्ता के अनुसार, लाजपत नगर स्थित शालीमार टेक्सटाइल्स में छापेमारी के दौरान डिजिटल डिवाइसेज, संदिग्ध चैट्स, विदेशी फंड ट्रांसफर और हवाला चैनलों के सबूत मिले हैं। ये साक्ष्य पाकिस्तानी हैंडलर्स के साथ बातचीत और आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग के नेटवर्क को उजागर करते हैं। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि यह नेटवर्क खाड़ी देशों में सक्रिय विदेशी नागरिकों और कश्मीर में ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर में अशांति और हिंसा को बढ़ावा देने की साजिश रच रहा था।

जांच में जुटी एजेंसियां
मोहम्मद अयूब भट, जो बडगाम का रहने वाला है और लाजपत नगर में एक कारोबारी यूनिट संचालित करता था, इस फंडिंग नेटवर्क का प्रमुख मोहरा था। उसके साथी मोहम्मद रफीक शाह, श्रीनगर के बेमिना का निवासी, भी इस साजिश में शामिल था। दोनों से पूछताछ जारी है, और जांच एजेंसियां इन डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कर रही हैं ताकि नेटवर्क के पूरे दायरे का खुलासा हो सके।