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मध्य प्रदेश के गांवों की बदलेगी तस्वीर, वृंदावन ग्राम योजना की खास बातें…

भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाई देने के लिए एक दूरदर्शी पहल की शुरुआत की है। ‘मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना’ के माध्यम से सरकार का लक्ष्य गांवों को केवल आत्मनिर्भर ही नहीं, बल्कि शहरों जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस करना है। इस योजना को विशेष रूप से ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और गांव की आर्थिक नींव को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है, ताकि एक खुशहाल ग्रामीण परिवेश का निर्माण हो सके।

चयन के मानक और योजना का स्वरूप: पशुपालन और आबादी पर जोर

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इस योजना का औपचारिक शुभारंभ 1 जुलाई 2025 को किया गया था। योजना के अंतर्गत उन गांवों को ‘वृंदावन ग्राम’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिनकी जनसंख्या 2000 से अधिक है और जहाँ कम से कम 500 गौवंश या अन्य दुधारू पशु उपलब्ध हैं। योजना का मुख्य फोकस कृषि, ऊर्जा और पशुपालन के बीच एक बेहतर तालमेल बिठाना है। इन गांवों को मॉडल ग्राम बनाकर यहाँ प्राकृतिक खेती और स्वच्छ ऊर्जा के विकल्पों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे गांव अपनी जरूरतों के लिए खुद सक्षम बन सकें।

रोजगार के अवसर और आधुनिक बुनियादी ढांचा

पलायन रोकने के लिए इस योजना के तहत गांवों में ही डेयरी उद्योग, स्थानीय हस्तशिल्प और पर्यटन केंद्रों का विकास किया जा रहा है। वनोपज और कृषि आधारित लघु उद्योगों के जरिए युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। बुनियादी सुविधाओं की बात करें तो इन गांवों में अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management) और ‘ग्रे वॉटर मैनेजमेंट’ जैसी आधुनिक प्रणालियाँ लागू की जा रही हैं। साथ ही, गांवों के पारंपरिक सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार कर उनकी ऐतिहासिक पहचान को भी सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है।