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ब्यावरा-देवास फोरलेन निर्माण में ली थी हजारों पेडों की बलि, लेकिन नजर नहीं आ रहे पेड़

सारंगपुर। नेशनल हाईवे-52 पर ब्यावरा से देवास तक 1609.48 करोड रुपए से 141 किमी लंबा फोरलेन बनाने में पुरानी एनएच-3 सड़क के आसपास लगे करीब 13 हजार 849 पेडों को वर्ष 2016 में काट दिया गया था। टेंडर शर्तों और नियमों के अनुरूप यहां दोगुना से ज्यादा संख्या में पौधे लगाना थे, लेकिन सडक निमार्ता कंपनी ओरिएंटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड ने आधे पौधे भी नहीं लगाए। अगर 2019 में फोरलेन बनने के बाद पौधारोपण किया जाता तो इन 6 सालों में पौधे थोडे तो बडे होते, लेकिन इस पूरे फोरलेन के किनारों पर पेड-पौधे नजर नहीं आ रहे। हालांकि एनएचएआई अधिकारियों का कहना है कि एनएच-52 जो राजगढ़ क्षेत्र से वह अब उज्जैन डिवीजन में हो गया है इसलिए वही बेहतर बता सकते है कि पौधारोपण क्यूं नहीं हुआ।

बरसों पुराने हरे-भरे 13 से ज्यादा पेडों को चिह्नित कर काट दिया गया था।
गौरतलब है कि ओरिएंटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड ने साल 2016 के अंत में फोरलेन निर्माण शुरू किया। इस दौरान मार्ग निर्माण में बाधा बन रहे हरे-भरे और बरसों पुराने 13 हजार 849 पेड़ों को चिह्नित कर काट दिया गया। यहां आम, जामुन, नीम, इमली, पीपल, बरगद, नीलगिरी, कनेर, शीशम, बबूल, गुलमोहर सहित अन्य छायादार और फलदार पेड थे, जो हाईवे निर्माण के लिए बलि चढा दिए गए। इन पेडों की कटाई के दौरान ग्रामीणों ने विरोध भी किया था, लेकिन उसे दरकिनार कर दिया गया। सडक निमार्ता कंपनी को काटे गए पेडों की तुलना में दोगुना से ज्यादा पौधे मार्ग के आसपास और डिवाइडर पर लगाना थे, लेकिन पौधे नहीं लगाने से सीमेंट कांक्रीट के 141 किमी लंबे इस रोड पर हरियाली नजर ही नहीं आ रही और मार्ग विरानसा नजर आता है। फोरलेन शुरू होने के समय शहरी क्षेत्रों के आसपास सड़क किनारे कुछ स्थानों पर पौधे लगाए थे और डिवाइडर पर हरी घास रोपी थी, लेकिन देखरेख के अभाव में ये पनप ही नहीं पाए और बढने से पहले ही दम तोड गए।

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पौधे किसानों ने खराब कर दिए
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों से जब चर्चा की गई और उनसे काटे गए पेडों की तुलना में दोगुना से ज्यादा पौधे लगाने पर सवाल किया गया। जिसके जवाब में उन्होंने किसानों द्वारा पौधों को खराब करने का तर्क दिया। अधिकारियों कहा कि रोड बनने के बाद पौधरोपण किया गया था। लेकिन आसपास के किसान पौधों को पनपने नहीं देते। इस कारण करीब हजारो पौधे खराब हो चुके हैं। कई जगह पर नरवाई जलाने से भी पौधे जल गए। कुछ जगह लोग पौधों में केमिकल डाल देते हैं। अधिकारियों का कहना है कि हाईवे पर फेंसिंग लगाने का प्रावधान तो है नहीं, ऐसे में पौधे पनप नहीं सके। पौधों को बडा करने की जिम्मेदारी सभी की है।

यह भी कमियां
फोरलेन में जगह-जगह दरारें हो रही हैं। सरफेस उखड रही है, इस कारण वाहनों के टायर समय से पहले ही खराब हो रहे हैं। सरफेस उखडने से दोपहिया वाहन 60 और चार पहिया वाहन 80 की स्पीड पर आते ही जंप करने लगते हैं। महंगा टोल चुकाने के बाद भी राहगीरों को सपाट सडक का लाभ नहीं मिल रहा। कुछ स्थानों पर दरारों की मरम्मत की जाती है जिससें आवागमन भी बाधित होता है। इधर सडक निर्माण की कई कमियां भी अब सामने आ रही हैं। ग्राम मऊ में फ्लाई ओवर अगर गुलावता जोड़ तक बना दिया जाता तो यहां हादसों में कमी आती और यह जगह ब्लैक स्पॉट नहीं बनती। ऐसे ही कांकरिया जोड़ पर तारागंज रोड के पास भी फ्लाई ओवर की जरूरत थी, जो नहीं बनाया गया।

बोले जिम्मेदार
रोड बनने के बाद पौधरोपण किया गया था। लेकिन आसपास के किसान पौधों को पनपने नहीं देते। वर्तमान में राजगढ़ क्षेत्र के एनएच-52 मार्ग को उज्जैन डिवीजन में कर दिया गया है। वही अब इसमें कुछ कह सकते है।
-आदित्य कुमार, डिप्टी मैनेजर, एनएचआई, ब्यावरा-इंदौर।