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कांग्रेस के जिला अध्यक्षों की घोषणा के साथ ही इस्तीफों का दौर शुरू

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस के 71 शहर और ग्रामीण जिला अध्यक्षों के नाम की घोषणा के साथ ही बवाल शुरू हो गया है। भोपाल, रायसेन, देवास समेत कई जिलों में कार्यकतार्ओं ने विरोध करते हुए पदों से इस्तीफा देना शुरू कर दिए हैं। विरोध कर रहे कार्यकतार्ओं का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व ने युवाओं और नए चेहरों को अवसर देने का वादा किया था, लेकिन नियुक्तियों में फिर से पुराने और प्रभावशाली नेताओं को ही तरजीह दी गई। कई कार्यकतार्ओं ने सवाल उठाया कि अगर, पुराने चेहरों को ही जिला अध्यक्ष बनाना था तो दो महीने तक संगठन सृजन अभियान क्यों चलाया गया? कुछ जिलों में कार्यकतार्ओं ने खुलकर नाराजगी जताई है और इसे पार्टी की कथनी और करनी में अंतर बताया है। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस असंतोष को शांत करने के लिए क्या कदम उठाती है।

 भोपाल में मोनू सक्सेना फैन क्लब नाम के सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा गया कि राहुल गांधी ने मांगा था संगठन सृजन, भोपाल में हुआ उसका विसर्जन। मोनू सक्सेना भोपाल में जिला अध्यक्ष के लिए दावेदार थे। उन्हें दिग्विजय सिंह का करीबी माना जाता है। इस मामले में मोनू सक्सेना ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी संगठन सृजन के माध्यम से पार्टी को मजबूत करना चाहते थे, लेकिन प्रदेश के नेतृत्व ने उनको गुहराम करते हुए भाजपा से मिले जुले लोगों को अध्यक्ष का पद दे दिया। भोपाल में प्रवीण सक्सेना को दोबारा अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि पूरा भोपाल जानता है कि उनके भाई और उनका काम धंधा भाजपा के लोगों के साथ सांठगांठ करके चलता है। 2023 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को ब्लैकमेल करके मुझे हटा कर अध्यक्ष पद सौंपा गया। इसके बावजूद मैं चुप रहा। जमीन पर पार्टी के लिए लड़ाई लड़ी। मुझ पर 78 केस हैं। भाजपा सरकार के पटवारी घोटाले के खिलाफ आंदोलन में मेरी एक आंख फूटी। अब अन्याय नहीं सहेंगे। मैं राहुल गांधी से प्रभावित हूं, प्रदेश के पदाधिकारियों ने उन्हें गुमराह करके यह नियुक्ति कराई हैं। ये जमीन पर काम करने वाले कार्यकतार्ओं की हत्या हैं। पर्यवेक्षकों के सामने सबकुछ रखा गया। हमारे पास पर्याप्त प्रमाण हैं। अब इन सबको राहुल गांधीजी के सामने रखने के लिए समय मांगेगे।

 भोपाल में दोनों अध्यक्षों को फिर मौका

बता दें कांग्रेस ने संगठन सृजन अभियान के तहत लंबे समय बाद जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की है। इसमें 6 विधायक, 11 पूर्व विधायक और 21 जिला अध्यक्षों को फिर मौका दिया गया है। इसमें भोपाल से प्रवीण सक्सेना को शहर और अनोखी पटेल को ग्रामीण से दोबारा अध्यक्ष बनाया गया है। 71 नामों में 12 ओबीसी, 10 एसटी और 8 एससी से है। वहीं, तीन अल्पसंख्यक और चार महिलाओं को भी मौका दिया गया है।

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 दिग्गी के बेटे और भतीजे को बनाया अध्यक्ष

कांग्रेस ने जिन विधायकों को जिला अध्यक्ष बनाया है उनमें जयवर्धन सिंह, सिद्धार्थ कुशवाह, महेश परमार, संजय उइके, देवेंद्र पटेल के नाम शामिल हैं। वहीं, पूर्व विधायकों में दिग्विजय सिंह के भतीजे प्रियव्रत सिंह राजगढ़, अशोक मसकोले, निलय डागा, रवींद्र महाजन, मुकेश पटेल, विपिन वानखेड़े समेत अन्य शामिल हैं।

कमलनाथ के 11 और दिग्विजय 5 समर्थक बने जिला अध्यक्ष

कांग्रेस की जिला अध्यक्षों की सूची में पूर्व सीएम कमलनाथ के 11 और दिग्विजय सिंह के बेटे और भतीजे को मिलाकर पांच समर्थक जिला अध्यक्ष बनें। कमलनाथ के दस समर्थक छिंदवाड़ा, पाढूंणा, बालाघाट, जबलपुर, डिंडोरी, मंडला, रीवा ग्रामीण, सतना ग्रामीण, सिवनी, सिंगरौली ग्रामीण और बैतूल जिले के अध्यक्ष बने हैं। दिग्विजय सिंह के पांच समर्थक, गुना, राजगढ़, अशोकनगर, खंडवा ग्रामीण, टीकमगढ़ के जिला अध्यक्ष बने हैं। वहीं, जीतू पटवारी के पांच समर्थक- भोपाल शहर, भोपाल ग्रामीण, इंदौर शहर, इंदौर ग्रामीण, सीहोर और देवास ग्रामीण के जिला अध्यक्ष बने हैं।