बारंगा में दुपट्टा पहनाने के बाद गरमाई आदिवासी सियासत, भाजपा में शामिल होने की चर्चा पर आया स्पष्टीकरण
हरदा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर पूर्व मंत्री कमल पटेल के बारंगा स्थित निज निवास पर आयोजित कार्यक्रम के बाद आदिवासी समाज से जुड़े नेताओं की सोशल मीडिया पोस्टों ने स्थानीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। उक्त फोटो भी पूर्व मंत्री कमल पटेल की आईडी से शेयर हुई थी।
कार्यक्रम की सामने आई तस्वीरों में कमल पटेल कुछ आदिवासी युवाओं और जयस से जुड़े पदाधिकारियों के गले में भाजपा लिखा दुपट्टा पहनाकर स्वागत करते दिखाई दे रहे हैं। तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा शुरू हुई कि क्या कार्यक्रम में शामिल लोगों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है।
सत्यनारायण सुचार ने पोस्ट कर दी सफाई
इसी बीच जयस जिलाध्यक्ष सत्यनारायण सुचार की ओर से सोशल मीडिया पर एक विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित व्यक्ति द्वारा भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने की बात सही नहीं है। उन्होंने भाजपा ज्वाइन करने अथवा भाजपा के साथ किसी राजनीतिक सौदे की बात को गलत, निराधार और भ्रामक बताया।
सुचार ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि यदि किसी के पास भाजपा की सदस्यता लेने या किसी प्रकार के राजनीतिक सौदे से संबंधित दस्तावेज, प्रमाण अथवा विश्वसनीय साक्ष्य हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने बिना प्रमाण किसी व्यक्ति या संगठन की छवि खराब करने वाली जानकारी प्रसारित नहीं करने की बात कही।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी के स्वागत या सम्मान किए जाने का अर्थ किसी राजनीतिक संगठन में शामिल होना नहीं है। पोस्ट में समाज के लोगों से किसी भी खबर या सोशल मीडिया पोस्ट को आगे साझा करने से पहले उसकी वास्तविकता जांचने की अपील की गई है।
‘समाज के सौदे’ को लेकर भी उठे सवाल
दूसरी ओर, जय कुमार उइके ने हरदा जयस के कार्यकर्ताओं के नाम सोशल मीडिया पोस्ट में समाज के प्रति की गई मेहनत के “सौदे” को लेकर सवाल उठाए और कार्यकर्ताओं से सतर्क रहने की अपील की।
वहीं अनिल माणिक की पोस्ट में आदिवासी समाज के अधिकार, हित और स्वाभिमान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। उन्होंने राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बदलते संबंधों को लेकर सवाल उठाते हुए समाज के प्रतिनिधियों के चुनाव में सोच-समझकर निर्णय लेने की अपील की।
दुपट्टे की तस्वीरों से शुरू हुआ मामला, अब सोशल मीडिया बयानबाजी तक पहुंचा
पूरे मामले में एक तरफ भाजपा के दुपट्टे के साथ सामने आई तस्वीरें हैं, तो दूसरी तरफ संबंधित लोगों की ओर से भाजपा में शामिल होने की चर्चा का खंडन और स्पष्टीकरण सामने आया है।
फिलहाल उपलब्ध सोशल मीडिया पोस्टों के आधार पर इतना स्पष्ट है कि सम्मान के दौरान दुपट्टा पहनाया गया था, जबकि संबंधित पक्ष राजनीतिक सदस्यता या सौदे की चर्चा को नकार रहा है। इसी को लेकर आदिवासी समाज और स्थानीय राजनीति में सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है।

