मकड़ाई समाचार भोपाल। प्रदेशभर के जंगलों से वन्य प्राणियों का शिकार करके उनके मांस और अन्य अवशेषों को भोपाल में खपाया जा रहा है। यह चलन पिछले 10 सालों में बढ़ा है। साल में एक-दो शिकारियों को ही वन अमला पकड़ता है और वन अपराध के तहत कार्रवाई करता है। हाल में गुरुवार तड़के इसी तरह की एक घटना सामने आई है, जिसमें सागर की तरफ से वन्यप्राणियों का शिकार करके वाहन से मांस लेकर भोपाल आ रहे शिकारियों को पकड़ने के लिए वन अमला सूखी सेवनिया थाना के पास तैनात था, लेकिन शिकारी उनकी आंख में धूल झोंक कर निकल गए। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे गिरोह को पकड़ने में संदिग्धों की कॉल डिटेल रिपोर्ट बड़ी मदद कर सकती है, लेकिन वन विभाग शिकारियों से जुड़े ज्यादातर मामलों में कॉल डिटेल की मदद नहीं ले रहा है। इसका फायदा शिकारियों और उनसे मांस खरीदने वालों को मिल रहा है। यदि भोपाल का वन अमला पुलिस की तर्ज पर किसी भी अपराधी की कॉल डिटेल रिपोर्ट निकालकर उसके आधार पर कार्रवाई करे तो शिकारियों तक आसानी से पहुंचा ही जा सकेगा, साथ ही पूरे गिरोह का पर्दाफाश होगा और वन्यप्राणियों के शिकार की घटनाओं पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी।
ऐसे मदद करेगी कॉल डिटेल रिपोर्ट
किसी अपराध में जब भी कोई आरोपित पकड़ में आता है तो पुलिस सबसे पहले उसकी कॉल डिटेल खंगालती है और उसके आधार पर पता चलता है कि आरोपित के तार किस-किस से जुड़े हैं, वह कब और कहां जाता है। इस आधार पर पुलिस दूसरे लोगों को पकड़ती है और पूछताछ करने पर ज्यादातर मामलों में बड़े खुलासे होते हैं। शिकारियों के मामले में कॉल डिटेल रिपोर्ट निकालकर वन विभाग का अमला अगर कार्रवाई करे, तो ऐसे शिकारियों और वन्यप्राणियों का मांस खरीदने वाले लोगों का पता चल सकता है, जो भोपाल में सालों से सक्रिय हैं और वन्य प्राणियों के मांस की खरीद-फरोख्त में शामिल है।
लाइसेंस निरस्त करने की अनुशंसा से भी बच रहा विभाग
भोपाल वन मंडल शिकार के मामले में पकड़े गए लोगों के लाइसेंस निरस्तीकरण अनुशंसा से भी बच रहा है। पिछले 10 साल में भोपाल वन वृत्त और सामान्य वन मंडल में गंभीर शिकार की 100 से अधिक घटनाएं हुई। इनमें से किसी भी आरोपित के हथियार लाइसेंस वन विभाग ने निरस्त करने की अनुशंसा नहीं की। जबकि सूत्रों की मानें तो जितने भी शिकारी पूर्व में पकड़े गए थे, उनमें से ज्यादातर के पास खुद की बंदूक होने के प्रमाण मिले थे। यह भी पता चला था कि शिकारियों के रिश्तेदारों के पास भी बंदूक व अन्य हथियारों के लाइसेंस हैं।
शिकारियों को पकड़ने में भी पीछे
वन अमला शिकारियों को पकड़ने में भी पीछे है। पिछले सालों में शिकार से जुड़ी कई घटनाएं हो चुकी हैं। ज्यादातर मामलों में आरोपितों को अब तक नहीं पकड़ा जा सका है। इस संबंध में भोपाल सामान्य वन मंडल के डीएफओ एचएस मिश्रा का कहना है कि शिकारियों पर दबिश दी जा रही है। कॉल डिटेल्स जरूरत के हिसाब से निकालते हैं और कार्रवाई भी की जा रही है। जहां कमी होगी, उसमें सुधार करेंगे।

