रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी (Arnab Goswami) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मुंबई पुलिस ने अर्नब गोस्वामी (Arnab Gaoswami) को उनके घर से गिरफ्तार किया गया है। मुंबई पुलिस ने अर्नब गोस्वामी को इंटीरियर डिजाइनर की आत्महत्या के दो साल पुराने मामले में गिरफ्तार किया है। अर्नब गोस्वामी का कहना है कि पुलिस ने उनके साथ-साथ उनके परिजनों के साथ मारपीट की है।
रिपब्लिक टीवी ने अर्नब के घर के लाइव फुटेज भी दिखाए, जिसमें पुलिस और अर्नब के बीच झड़प होती दिख रही है। अर्नब ने पुलिस पर उनके और उनके सास-ससुर, बेटे और पत्नी के साथ मारपीट का आरोप लगाया। रिपब्लिक टीवी का दावा है कि अर्नब को उस मामले में गिरफ्तार किया गया है, जो पहले ही बंद किया जा चुका है। इंटीरियर डिजाइनर की बेटी अदन्या नाइक की शिकायत के आधार पर इस साल मई में इस मामले की फिर से जांच करने की घोषणा की गई थी।
समाचार एजेंसी एएनआई ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें अर्नब गोस्वामी को पुलिस द्वारा ले जाया जा रहा है। अर्नब ने पुलिस की गाड़ी के अंदर से कहा कि पुलिस ने उनको मारा है।
अमित शाह ने कांग्रेस को घेरा :
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मामले में कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने ट्वीट किया, कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने एक बार फिर लोकतंत्र को शर्मसार किया है। रिपब्लिक टीवी और अर्नब गोस्वामी के खिलाफ राज्य की सत्ता का दुरुपयोग व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है। यह हमें आपातकाल की याद दिलाता है। प्रेस पर हमले का विरोध होना चाहिए।
जावड़ेकर ने की गिरफ्तारी की निंदा :
अर्नब गोस्वामी को गिरफ्तार किए जाने पर राजनीति शुरू हो गई है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया। उन्होंने ट्वीट किया, मुंबई में प्रेस-पत्रकारिता पर जो हमला हुआ है वह निंदनीय है। यह इमरजेंसी की तरह महाराष्ट्र सरकार की कार्यवाही है। हम इसकी भर्त्सना करते हैं।
स्मृति ईरानी और धर्मेंद्र प्रधान ने की निंदा :
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने ट्वीट कर लिखा, स्वतंत्र प्रेस के लोग अगर आज अर्नब के समर्थन में नहीं खड़े होते हैं, तो आप रणनीतिक रूप से फासीवाद के समर्थन में हैं। आप भले ही उन्हें पसंद नहीं करते हों, आप उन्हें मान्यता नहीं देते हों, भले ही आप उनकी उपस्थिति को नजरअंदाज करते हों लेकिन अगर आप चुप रहे तो आप दमन का समर्थन करते हैं। अगर अगले शिकार आप होंगे, तो फिर कौन बोलेगा?
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रजातंत्र में इससे खराब दिन नहीं हो सकता है। सीनियर जर्नलिस्ट से ऐसा अमानवीय व्यवहार करने की कड़ी निंदा करना भी कम है। ये राजनीतिक उद्देश्य से किया गया है, हम इसकी निंदा करते हैं।

