jhankar
ब्रेकिंग
हरदा में निर्विरोध जनपद सदस्य के बाद सियासी घमासान आज का सुविचार - उठो, तुम शिव के अंश हो तुम्हें किसने कह दिया कि तुम कमजोर हो...? खेत में महिला को सांप ने काटा हुई मौत , दूसरी ओर युवती ने लगाई फांसी आज 04- अक्टूबर - रविवार सुबह की देश राज्यों से बड़ी खबरे  भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी के कायल हुए इजरायली PM नेतन्याहू भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में 179 छात्रों ने लिया भाग हरदा के टिमरनी में पागल सियार का आतंक, 6 लोग घायल अनूपपुर में दिल दहला देने वाली वारदात :  युवक ने परिवार के लोगो पर हमला किया नाना नानी, मां और मामा... जिला पंचायत सदस्य उप निर्वाचन 2026  मतगणना और परिणाम की घोषणा 5 अक्टूबर को पॉलिटेक्निक कॉलेज में हो... केन्द्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके 4 अक्टूबर को हरदा आएंगे

कारम बांध की योजना में शुरू हुई गड़बड़ी ने बर्बाद किए 100 करोड़

मकड़ाई समाचार भोपाल। धार जिले के कारम बांध से पानी रिसने और बाइपास चैनल बनाकर पानी बहाने की मजबूरी के लिए बांध निर्माण करने वाली कंपनी और जल संसाधन विभाग के अधिकारी तो जिम्मेदार हैं ही, कार्ययोजना (प्लानिंग) में भी चूक हुई है। इस क्षेत्र के विशेषज्ञ बताते हैं कि नहर और उसके जरिये पानी निकासी का रास्ता बनाए बगैर बांध को चौतरफा बंद करना ही नहीं था। यदि पानी निकासी का रास्ता बनाया गया होता तो यह स्थिति नहीं बनती। सौ करोड़ रुपये की लागत राशि भी बर्बाद नहीं होती। इस बात का ध्यान रखना इंजीनियरों का काम है। घटनाक्रम देखकर स्पष्ट हो रहा है कि बांध की पाल बनाते समय इंजीनियर मौके पर गए ही नहीं। जल संसाधन विभाग से मुख्य अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हुए संतोष तिवारी कहते हैं कि किसी भी बांध की पाल बनाते समय उससे पानी के निकासी की जगह भी बनाई जाती है ताकि अचानक अधिक पानी आने पर उसे निकाला जा सके और बांध को कोई नुकसान न पहुंचे। इस बांध के मामले में ऐसा नहीं हुआ।

पाल के आगे कई तरह की कैनाल बनाई जानी चाहिए थी। ‘स्पिल-वे’ बनाना था। बांध का अतिरिक्त पानी उसी से निकाला जा सकता है। जब तक यह न बनें, तब तक पानी को निकलने की जगह दी जाती है। ऐसा करने से बांध की दीवार को नुकसान से बचाया जा सकता है। एक अन्य सेवानिवृत्त अधिकारी के अनुसार निर्माण कार्यों में गड़बड़ी की बड़ी वजह उसी कंपनी की प्लानिंग से निर्माण करवाना है। प्रदेश में पांच साल पहले ही यह परिपाटी शुरू हुई है।

जल संसाधन विभाग की कोशिश रहती है कि जो कंपनी काम कर रही है, वही प्लान भी तैयार कर ले। इसे ऊपरी स्तर पर देखकर मंजूरी दी जाती है पर मैदानी स्तर पर प्लानिंग के हिसाब से काम हो रहा है या नहीं, कोई नहीं देखता। यहां तक कि निरीक्षण भी औपचारिकता ही होते हैं। जब तक कि कोई बड़ी कमी खुद-ब-खुद दिखाई न देने लगे।

- Install Android App -

कारम बांध निर्माण की अनियमितता को लेकर क्यों नहीं कराई प्राथमिकी : कांग्रेस

कारम बांध निर्माण की अनियमितता पर अब तक प्राथमिकी न कराए जाने को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पार्टी के मीडिया विभाग ने सरकार से पूछा है कि जिस कंपनी को ठेका दिया गया, उसकी जगह दूसरी कंपनी कैसे काम कर रही थी। बांध निर्माण के साथ वर्षा से पहले जो सावधानियां बरती जानी चाहिए थीं, वो क्यों नहीं बरती गईं। प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में बांध, सड़क, पुल-पुलिया और भवनों के गुणवत्ताहीन निर्माण के कई प्रकरण सामने आ चुके हैं। सभी में जांच के नाम पर लीपापोती करने के अलावा कुछ नहीं हुआ।

एक भी कंपनी या अधिकारी के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पिछले दिनों ही मंडीदीप के पास पुल का एक हिस्सा ध्वस्त हो गया। इसी तरह कारम बांध के निर्माण में भी भ्रष्टाचार हुआ है। दिल्ली की जिस एएनएस कंपनी को ठेका दिया गया था, उसने किसी और को दे दिया। विभाग के अधिकारी आंख बंद करके बैठे रहे। बांध निर्माण के साथ संभावित वर्षा से पहले जो सावधानियां बरतनी चाहिए थी, वह भी नहीं बरती गई। इस मामले में न तो कंपनी के कर्ताधर्ताओं और जिम्मेदारी अधिकारियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई हुई है।