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पटना में संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार, पीएम मोदी को निशाना बनाने की थी साजिश

बिहार के फुलवारी शरीफ क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है। पटना में NIA ने एक संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया है और दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, मॉड्यूल 2047 तक भारत को एक इस्लामिक राष्ट्र बनाने की योजना बना रहा था। 12 जुलाई को अपनी यात्रा के दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने की साजिश भी थी। गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों की पहचान अतहर परवेज और मोहम्मद जलालुद्दीन के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि संदिग्ध आतंकियों को पीएम मोदी के दौरे से 15 दिन पहले फुलवारी शरीफ में ट्रेनिंग दी जा रही थी। उन्होंने पीएम मोदी को निशाना बनाने के तरीकों की साजिश रचने के लिए 6 और 7 जुलाई को बैठकें कीं।

इंटेलिजेंस ब्यूरो को मिल चुकी थी खबर

इंटेलिजेंस ब्यूरो को सूचना मिली कि पटना के फुलवारी शरीफ इलाके में एक संभावित आतंकी मॉड्यूल सक्रिय है, जिसके बाद पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने 11 जुलाई को नया टोला इलाके में छापेमारी कर दोनों संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया। बिहार पुलिस ने संदिग्ध आतंकियों के फुलवारीशरीफ कार्यालय में छापेमारी की। छापेमारी के दौरान, पुलिस को आपत्तिजनक दस्तावेज मिले, जिनमें से एक का शीर्षक था – ‘2047 इंडिया टुवर्ड्स रूल ऑफ इस्लामिक इंडिया’। इनके पास से 25 पीएफआई के पर्चे भी बरामद किए गए।

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जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्‍य

जांच में पता चला है कि यहां आने वाले ज्यादातर युवक केरल, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और कई अन्य राज्यों से आतंकी साजिश की ट्रेनिंग लेने आते थे। पुलिस ने खुलासा किया है कि गिरफ्तार किए गए दोनों को देश में रहकर देश विरोधी अभियान चलाने के लिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की सहित कई इस्लामिक देशों से पैसे मिलते थे।

हिरासत में लिए गए रिटायर्ड कॉप

फुलवारी शरीफ सहायक पुलिस अधीक्षक ( एएसपी) मनीष कुमार ने कहा कि गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान झारखंड के एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी मोहम्मद जल्लाउद्दीन और अतहर परवेज के रूप में हुई है। उनके पीएफआई के साथ संबंध हैं। जलाउद्दीन पहले स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) से जुड़ा था। उन्होंने कहा, “वे स्थानीय लोगों को तलवार और चाकू का इस्तेमाल करना सिखा रहे थे और उन्हें सांप्रदायिक हिंसा के लिए भी उकसा रहे थे। एक जांच में पता चला है कि अन्य राज्यों के लोग पटना में उनके पास आ रहे थे। वे बिहार की राजधानी के होटलों में रहने के दौरान अपना नाम बदल लेते थे।