सहायक आयुक्त ने लिखा प्रशासक को दोषियों पर कार्यवाही करने हेतु पत्र, ईधर मिलावट खोरों से ही खरीदी कराने के मुंड में है विभाग
कमिश्नर से की शिकायत में जिस कर्मचारी सईद खान को अलग रखने की की गई थी मांग उसी को मिल सकती है खरीदी की जिम्मेदारी
हरदा।
हरदा जिला अजब है गजब है साहब यहाँ पर अपराधियो का भ्रस्टाचारियो मिलावटखोरों का बोलबाला है। रगे हाथ गेहू में मिट्टी मिलाने वाला एक मामला दो महीने तक अखबारों की सुर्खियों में रहा लेकिन विभाग ने उसे नजर अंदाज कर दिया। जिस तरीके से समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहू में मिट्टी मिली हुई पाई गई थी। बदबूदार सड़े हुये गेहू खरीदे गए थे। समय के साथ ऐसे मामलों को विभाग ने संरक्षण देकर दबा दिया। लाखो रुपये की सेटिंग करके मिलावटखोर को अभयदान दे दिया। और अब विभाग उन्ही मिलावट खोरो से गेहू की खरीदी कराने के मुंड में है।
क्या है पूरा मामला:-
सरकारी समिति दीपगाव कला के गेहूं उपार्जन केंद्र दीपगाव कला और उप केंद्र आमासेल म मिट्टी मिलाने वाले मामले को लेकर समाचार पत्रों की सुर्खियों में बनी रहने वाली सहकारी समिति दीपगाव कला जोकि समिति प्रबंधक द्वारा गेहूं उपार्जन केंद्र पर किसानों से खरीदे गए गेहूं में मिट्टी मिलाने वाले मामले को लेकर और अधिकारीयों के द्वारा लगभग 2016 से अब तक जांच और कार्यवाही के नाम पर दोषी पाए जाने के बाद भी समिति प्रबंधक और साथियों पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा कोई संतोषजनक कार्रवाई ना करने के कारण हमेशा ही चर्चाओं में बनी रहती है।इस बार फिर सहायक आयुक्त सहकारिता हरदा के द्वारा एक पत्र जिसका क्र,,/उपार्जन,/2020/252 हरदा ,दिनाक 12,03,2020 जसरी करते हुए श्री आर के पारे उप अंकेक्षण एवं प्रशासक सेवा सहकारी समिति मर्यादित दीपगाव कला को लिखा गया जिसमें उल्लेख किया गया है कि जिला आपूर्ति अधिकारी हरदा के पत्रिका अवलोकन करते हुए तय समय सीमा में समिति के प्रबंधक अशोक पारे केंद्र प्रभारी हरगोविंद कुशवाहा एवं सहायक प्रबंधक राजेंद्र कुशवाह रहे हैं उक्त मामले में आदेशित करते हुए लिखा गया के उक्त प्रकरण के संबंध में जांच रिपोर्ट एवं कलेक्टर के पत्र अनुसार दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए कार्यालय को अवगत कराने की बात कही गई है वही शिकायत कर्ताओं के द्वारा एक पत्र कमिश्नर महोदय नर्मदापुरम संभाग को भी दिया गया था जिसमें समिति के कर्मचारी शहीद खान को भी गेहूं खरीदी से अलग रखने की मांग की गई थी क्योंकि यह समिति प्रबंधक के बहुत करीबी माने जाते हैं जिससे ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि अगर खरीदी इनके माध्यम से भी कराई जाती है तो कहीं ना कहीं पूर्व की तरह है गेहूं में मिट्टी मिलाने से मामले को अंजाम दिया जा सकता है लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विभाग सहकारी समिति दीपगाव कला मैगजीन लोगों के माध्यम से खरीदी करवाना चाहता है उसमें सहीद खान का नाम सबसे पहले नंबर पर है अब ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि अधिकारी उन्हीं लोगों को खरीदी क्यों देना चाहते हैं जिनके खिलाफ शिकायत की गई है वही इस मामले में अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को लेकर कब तक दोषियों पर जी कार्यवाही करते हैं या फिर पूर्व की तरह ही यह पत्र भी कार्यवाही के नाम पर फाइलों में भविष्य के लिए दबा दिया जाएगा वही अधिकारियों की इस प्रकार की कार प्रणाली से भ्रष्टाचार करने वालों के हौसले बुलंद होते दिखाई देते हैं क्योंकि आए दिन सहकारी समितियों में होने वाले घोटाले और फर्जीवाड़े इसके जीते जागते उदाहरण हैं वही सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कमिश्नर को की गई शिकायत मैं जिन लोगों को खरीदी केंद्र से अलग-थलग रखने के लिए शिकायत की गई थी उन्हीं लोगों को उपार्जन केंद्रों पर गेहूं खरीदी की जिम्मेदारी देने की बात सामने आ रही है अब ऐसे में अधिकारियों की मंशा को लेकर भी कई प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं।
इनका कहना है:-
हमारे द्वारा दीपगॉव कला समिति के किसी भी सदस्य को खरीदी करने की अनुमति नही दी गई।
अखिलेश चौहान
सहायक आयुक्त सहकारिता विभाग हरदा।


