jhankar
ब्रेकिंग
पिछले 24 घंटों में जिले में 15 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज बारिश के मौसम में मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने की अपील - पानी जमा न होने द... गुरव समाज ने श्रद्धा और उत्साह से मनाया महर्षि दधीचि जन्मोत्सव सामाजिक न्याय आयुक्त श्री कृष्ण गोपाल तिवारी ने किया हरदा जिले का प्रवास विद्युत उपभोक्ताओं की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए लगाए गए “संपर्क अभियान” शिविर लोभ और असंतोष कम होने से आती है मन की पवित्रता : अनिता दीदी हमें निष्पादक नहीं सहयोगी बनाइए तभी काम करेंगे’-पटवारी संघ सड़क किनारे बेहोश मिला था युवक, चार दिन बाद इलाज के दौरान मौत झूठे केस में किसान को फंसाने का आरोप, ग्रामीणों ने SP से निष्पक्ष जांच की मांग सोना-चांदी पर UPI शुल्क हटाने की मांग, ज्वेलर्स एसोसिएशन ने वित्त मंत्री को लिखा पत्र

पितृपक्ष में भू-भवन, धन-संपत्ति आदि की खरीद पर पितरों की आत्मा प्रसन्न होती

हिंदू धर्म में जिस प्रकार से देवों की पूजा आराधना के लिए अलग-अलग माह समर्पित हैं, उसी तरह आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में देव तुल्य पितरों की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि पितृपक्ष में अपने वंशजों के आह्वान पर देव-पितर धरा पर आते हैं। श्राद्ध-तर्पण से संतुष्ट होने के बाद सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देकर अपने धाम को चले जाते हैं। ज्योतिर्विद इस काल को पितरों की आराधना का पुण्य काल बताते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस काल में भू-भवन, धन-संपत्ति आदि की खरीद की जाए तो पितरों की आत्मा प्रसन्न होती है।

- Install Android App -

खरीदी बिक्री की मनाही का शास्त्रों में जिक्र नहीं

पितरों के श्रद्धा के समय में शुभ-अशुभ का हवाला देते हुए खरीद-बिक्री की पांबंदी की बात हम सुनते रहते हैं लेकिन शास्त्रों में कहीं भी इसका जिक्र नहीं है। पितरों को देव कोटि तुल्य माना जाता है। शादी-विवाह हो या अन्य मंगल कार्य, पितरों को सबसे पहले आमंत्रित किया जाता है।पितृपक्ष श्रद्धा का पर्व है। हम पितरों का आह्वान करते हैं। सूर्य की संक्रांतियों अनुसार दिनों का बंटवारा किया जा रहा था, तब बचे हुए 16 दिनों को विशेष रूप से पितरों को समर्पित किया गया। इसमें भू-भवन समेत कोई भी वस्तु खरीदना शुभ होता है। हिंदू धर्म शास्त्रों में खरीदारी को निषेध नहीं बताया गया है।