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उज्जैन मे रामघाट पर मिला ब्रह्मा जी के मन्दिर होने के सबूत अभी सिर्फ पुष्कर मे ब्रहमा जी का एकमात्र मन्दिर है ! 

मकड़ाई एक्सप्रेस 24 उज्जैन।महाकाल की नगरी उज्जैन में अनादिकाल से मंदिरों की भव्य और विशाल मन्दिरो के लिये जाना जाता है। यहां का मूर्ति शिल्प भी देश दुनिया में बेजोड़ रहा है।परमार काल में राजाभोज ने अनेक मंदिर बनवाए थे।

उज्जैन मे ब्रह्मा जी का मन्दिर

पूरे भारत मे ये बात सभी जानते है कि राजस्थान के पुष्कर में ब्रह्माजी का एकमात्र मंदिर है। हालांकि उज्जैन में मोक्षदायिनी शिप्रा के रामघाट पर भी ब्रह्माजी का मंदिर होने के प्रमाण मिले हैं।

इतिहासकार और पुरातत्व विशेसज्ञ कर रहे शोध
जानकारों का मानना है कि शिप्रा के तट पर ब्रह्माजी का विशाल मंदिर रहा होगा। आक्रांताओं ने आक्रमण कर मंदिर को क्षतिग्रस्त किया होगा। कालांतर में घाट के क्षेत्र के जीर्णोद्धार के समय मंदिर के भग्नावशेष तथा ब्रह्माजी की मूर्ति को यहां स्थापित किया गया होगा।

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रामघाट पर ब्रहमा की मूर्ति का शिल्प बेजोड़ है।

विक्रम विश्व विद्यालय के पुराविद डॉ. रमण सोलंकी ने बताया उज्जैन में अनादिकाल से मंदिरों की शृंखला रही है। यहां का मूर्ति शिल्प भी देश दुनिया में बेजोड़ रहा है। परमारकाल में भी राजाभोज ने अनेक मंदिर बनवाए तथा मूर्तियों का निर्माण कराया।

इसी समृद्ध शिल्प व मूर्ति कला के प्रमाण रामघाट स्थित सीढ़ियों पर भगवान ब्रह्मा तथा अग्निदेवता की मूर्तियों के रूप में मिलते हैं। यह दोनों मूर्तियां परमार काल की होकर एक हजार साल पुरानी है। चतुर्मुख ब्रह्मा की यह मूर्ति उच्चकोटी की है।इसमें तीन मुख सामने की ओर है, चौथा मुख दीवार में दबा हुआ है। ब्रह्माजी के हाथ में हवन में आहुति देने के लिए श्रुवा है। इस स्थान पर निश्चित ब्रह्माजी का भव्य मंदिर रहा होगा।

उत्कीर्ण शैली में स्थापित की ब्रह्माजी की मूर्ति

तीर्थपुरोहित ज्योतिर्विद पं.अमर डब्बावाला ने बताया रामघाट की सीढ़ी पर ब्रह्मा जी की मूर्ति उत्कीर्ण शैली की स्थापित की हुई है। परमार काल से जुड़े संस्कृति के नमूना इस मूर्ति में दिखाई देता है। यहां पर पूर्व में कोई मंदिर रहा था, जिसे तोड़ा गया बाद में हिन्दू शासकों ने इसे स्थापित किया फिर प्राकृतिक आपदा के कारण यह मूर्ति प्रभावित हुई। यहां वर्तमान में सीढ़ी बनाई गई है।