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भोपाल में शिक्षा समिति की मीटिंग में उठा मुद्दा; प्राइवेट स्कूलों की मान्यता पर भी नाराजगी

भोपाल। जिला पंचायत में गुरुवार को हुई शिक्षा समिति की बैठक में कई मुद्दों पर हंगामे जैसी स्थिति बनी। समिति के अध्यक्ष मोहन सिंह जाट, सदस्य विनय मेहर और विक्रम भालेश्वर ने कई विषयों पर जिम्मेदारों को आड़े हाथों लिया। अध्यक्ष जाट ने कहा कि जिले में कई स्कूल जर्जर है। मैंने खुद देखे हैं, पर इनकी मरम्मत नहीं हो रही है। सदस्य मेहर ने सवाल किया कि हर साल मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपए आ रहा है। फिर स्कूलों की ऐसी तस्वीर क्यों है?

जिला पंचायत के मीटिंग हॉल में यह बैठक हुई थी। इसमें डीईओ एनके अहिरवार समेत डीपीसी से लेकर बीईओ, बीआरसी, जनशिक्षक और स्कूल के प्रभारी भी शामिल हुए। खचाखच भरे मीटिंग हॉल में बैठने के लिए कुर्सियां कम पड़ गईं। इसी बीच अध्यक्ष, सदस्य और सदस्य प्रतिनिधियों ने मुद्दे उठाने शुरू किए। अध्यक्ष जाट एक इंजीनियर पर उखड़ पड़े। इंजीनियर से उन्होंने कहा कि आप शराब पीकर आते हैं। इस पर इंजीनियर ने कहा कि व्यक्तिगत आरोप मत लगाइए। जाट का कहना था कि उनके पास सभी सबूत है। सदस्य मेहर ने भी इस पर हामी भरी।

शिक्षक समय पर नहीं आते-डीईओ अहिरवार से इंजीनियर पर कार्रवाई करने को कहा गया। सदस्य प्रतिनिधि सुरेश राजपूत ने कहा, अमरावतकलां के हाईस्कूल में शिक्षक समय पर नहीं आते। जब शिक्षक ही नहीं आएंगे तो बच्चे कैसे समय का पालन कर सकेंगे। इसलिए शिक्षक समय का पालन जरूर करें। सदस्य प्रतिनिधि अनिल हाड़ा, विनोद राजोरिया और मिश्रीलाल मालवीय समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने साइकिल वितरण समेत अन्य कार्यों में जनप्रतिनिधियों को नहीं बुलाने पर नाराजगी जताई।
सीएम राइज स्कूल के बच्चों के लिए बस की व्यवस्था भी हो-सदस्य मेहर ने कहा कि जहां पर बरसों पुरानी जर्जर बिल्डिंग है, वहां नई बिल्डिंग स्वीकृत हो। जिन गांवों तक सीएम राइज स्कूल जाने के लिए बस व्यवस्था नहीं है, वहां तत्काल बस की व्यवस्था की जाए। उन्होंने बताया, जर्जर और पुराने स्कूलों की मरम्मत के लिए सरकार हर साल करोड़ों रुपए का बजट आवंटित करती है, लेकिन अफसरों की मिलीभगत से उनके चहेतों को काम दे दिया जाता है। दूसरी ओर, काम भी नहीं होता। यह गलत है। पुराने जो भी एग्रीमेंट हुए हैं, उन्हें निरस्त किया जाना चाहिए।

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कई स्कूलों की छतों में से पानी टपक रहा-कई स्कूलों की छतों में से पानी टपक रहा है। बाथरूम नहीं है। जहां बाथरूम बने हैं, उसमें से कई में कंडे और लकड़ियां भरी पड़ी है। ऐसे प्रभारी प्राचार्य पर भी कार्रवाई हो, जहां बच्चों के लिए बनाए गए टॉयलेट में लकड़ियां और कंडे भरें रखे हो। कानून और नियम सबके लिए बराबर है। शिक्षा के क्षेत्र में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

स्कूलों की मान्यता देना हो तो कॉल रिसीव कर लेते हैं-जनप्रतिनिधियों ने बैठक में कई अधिकारियों पर मोबाइल कॉल रिसीव नहीं करने का आरोप भी लगाया। कहा कि हम दिन में कॉल करते हैं तो अफसर रिसीव नहीं करते हैं, लेकिन जब प्राइवेट स्कूल को मान्यता देने की बात आती है तो रात में भी कॉल रिसीव कर ली जाती है। इस पर डीईओ अहिरवार ने बीआरसी, बीईओ, जनशिक्षकों से कहा कि ऐसा कतई नहीं होना चाहिए।

स्कूल प्रभारी बोलीं-मध्याह्न भोजन को लेकर अपशब्द कहे
बैठक के दौरान ही कई जनशिक्षक और शाला प्रभारियों ने स्कूल से जुड़ी समस्याओं के बारे में जनप्रतिनिधियों को बताया। इस दौरान एक महिला स्कूल प्रभारी ने मध्याह्न भोजन वितरण न होने और मध्याह्न भोजन प्रभारी द्वारा गलत शब्द कहे जाने पर नाराजगी जताई। इसके बाद समिति अध्यक्ष जाट ने मध्याह्न भोजन प्रभारी और कर्मचारियों को बैठक में ही तलब किया। यहां भी कर्मचारियों के बीच नोंकझोंक हो गई। हालांकि, बाद में अध्यक्ष जाट ने दोनों पक्ष को समझाइश दी और मामला शांत किया।