बड़वानी। बड़वानी जिले में केला किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बाजार में केले के कम दाम मिलने के कारण किसान अपनी तैयार फसल को खेत से उखाड़कर फेंकने पर मजबूर हैं। बड़वानी जिले को केला उत्पादन का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां का केला दिल्ली, हरियाणा, गुजरात और राजस्थान सहित कई राज्यों में भेजा जाता है, साथ ही बड़ी कंपनियों को सप्लाई और एक्सपोर्ट भी किया जाता है। हालांकि, इस बार हालात इतने खराब हैं कि किसानों को अपनी फसल नष्ट करनी पड़ रही है। ग्राम पीपलूद के किसान प्रमोद ने बताया कि उन्होंने 7 एकड़ में केले की खेती की थी। बाजार में उन्हें मात्र 2 रुपए प्रति किलोग्राम का भाव मिल रहा था, जो लागत निकालने के लिए भी पर्याप्त नहीं था। मजबूरन, उन्होंने 20 मजदूर लगाकर पूरी फसल उखाड़कर खेत से बाहर फेंक दी।
किसानों का आरोप है कि व्यापारी उन्हें उचित दाम नहीं दे रहे
किसानों के अनुसार, एक एकड़ में केले की खेती पर 1 से 1.5 लाख रुपए तक का खर्च आता है। इस बार उन्हें लागत निकलने की भी उम्मीद नहीं है। खेत को साफ करने के लिए 20 से 25 मजदूर प्रतिदिन 400 रुपए की मजदूरी पर काम कर रहे हैं। तीन से चार दिनों में पूरा खेत साफ होने के बाद किसान नुकसान की भरपाई के लिए डॉलर चना बोने की तैयारी कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि व्यापारी उन्हें उचित दाम नहीं दे रहे हैं। कम कीमत और बढ़ती लागत ने उनकी आर्थिक स्थिति खराब कर दी है। किसान सरकार से उचित समर्थन मूल्य (एमएसपी) और केले की सरकारी खरीद की व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं। कच्चे माल से लेकर पैदावार तक कड़ी मेहनत करने वाले किसान आज घाटे में हैं और अपनी खड़ी फसल नष्ट करने को मजबूर हैं। ऐसे में सरकार और प्रशासन से राहत की उम्मीद है, ताकि किसानों का खेती पर से भरोसा न उठे।

