लाल खदान रेल हादसा
अप्रशिक्षित व साइको टेस्ट में फेल चालक को ट्रेन सौंपना बना हादसे की मुख्य वजह
मकड़ाई एक्सप्रेस 24बिलासपुर। :जिले के लालखदान में चार नवंबर को हुए भीषण रेल हादसे को लेकर रेल सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) बी.के. मिश्रा ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट जारी कर दी है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दुर्घटना का सबसे बड़ा कारण एक ऐसे चालक को यात्री ट्रेन की कमान सौंपना था, जो न तो पूरी तरह प्रशिक्षित था और न ही साइकोलॉजिकल टेस्ट में पास हुआ था। इसी लापरवाही के चलते 12 लोगों की मौत और 20 से अधिक लोग घायल हुए थे।
हादसे में मेमू ट्रेन मालगाड़ी से जा टकराई
ज्ञात हो कि विगत 4 नवंबर को कोरबा–बिलासपुर लोकल मेमू अप लाइन पर खड़ी कोयला लोड मालगाड़ी से जा टकराई थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कई कोच क्षतिग्रस्त हो गए, यात्रियों की मौके पर ही मौत हुई और कई गंभीर रूप से घायल हुए। हादसे से रेलवे को करोड़ों रुपए का नुकसान भी हुआ।
तीन दिन तक स्थल निरीक्षण, सभी विभागों से पूछताछ
सीआरएस मिश्रा ने हादसे के बाद तीन दिनों तक स्थल निरीक्षण किया। उन्होंने इलेक्ट्रिकल ओपी, इलेक्ट्रिकल, एसएंडटी, मैकेनिकल, सीएंडडब्ल्यू समेत अन्य विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों से विस्तृत पूछताछ की। इसके बाद तकनीकी दस्तावेज़ों और रिपोर्टों का गहन अध्ययन भी किया गया।
मेमू ट्रेन की असिस्टेंट लोको पायलट से दो घंटे पूछताछ
हादसे के करीब 20 दिन बाद मिश्रा ने बिलासपुर के केंद्रीय रेलवे अस्पताल में असिस्टेंट लोको पायलट रश्मि राज से दो घंटे तक चर्चा की। इस दौरान ट्रेन की स्थिति, हादसे के समय के निर्णय और नियंत्रण प्रक्रिया को लेकर कई सवाल पूछे गए।
सीआरएस ने कहा—”यह हादसा सिस्टम फेलियर का नतीजा”
रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया है कि चालक साइको टेस्ट में सफल नहीं था, बावजूद इसके उसे यात्री ट्रेन चलाने की जिम्मेदारी दे दी गई। यह रेलवे प्रशासन की गंभीर चूक थी। नियमों के अनुसार केवल साइको टेस्ट में पास चालक ही यात्री ट्रेन का संचालन कर सकता है।
सीआरएस ने इसे ‘गंभीर प्रशासनिक लापरवाही’ बताते हुए प्रशिक्षण और मूल्यांकन प्रणाली में बड़े सुधार की सिफारिश की है।
जिम्मेदार अधिकारियों पर जल्द कार्रवाई की संभावना
रिपोर्ट सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। रेलवे के भीतर भी इस मामले को लेकर चिंता बढ़ी है, क्योंकि यह हादसा सिर्फ मानव गलती नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
रेल सुरक्षा पर फिर सवाल, सख्त सुधार की जरूरत
यह घटना एक बार फिर रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। रिपोर्ट संकेत देती है कि यदि प्रशिक्षण और परीक्षण प्रक्रिया में लापरवाही जारी रही, तो यात्रियों की जान हमेशा खतरे में रहेगी। यह हादसा भविष्य में मजबूत और पारदर्शी सुरक्षा तंत्र की आवश्यकता को उजागर करता है।

