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सेंधवा में CBI का बड़ा एक्शन: ‘निमाड़ एग्रो पार्क’ लोन घोटाले में तायल और जोशी परिवार के ठिकानों पर छापेमारी*

बड़वानी जिले के सेंधवा में आज सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब सीबीआई (CBI) की टीम ने शहर के दो प्रमुख ठिकानों पर दबिश दी तभी से शहर व्यापारियो में चर्चा हो रही पढ़िए पूरी खबर विस्तार से….

मकड़ाई एक्सप्रेस 24 बड़वानी। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के सेंधवा में बुधवार सुबह से ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की आर्थिक अपराध शाखा (कोलकाता) की टीम ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। करोड़ों रुपये के ‘लोन स्कैम’ और सरकारी सब्सिडी में हेरफेर के मामले में जांच एजेंसी ने शहर के जगन्नाथ पुरी और नारा पार क्षेत्रों में घेराबंदी की है।

इन ठिकानों पर जारी है जांच की आंच

सीबीआई की अलग-अलग टीमों ने एक साथ दो बड़े कारोबारी परिवारों के आवास पर छापेमारी की:

1. अशोक तायल का निवास (जगन्नाथ पुरी कॉलोनी):- तायल बंधुओं पर ‘निमाड़ एग्रो पार्क’ के नाम पर करीब 14 करोड़ रुपये के फंड डायवर्जन और गबन का आरोप है।

2. जोशी परिवार का निवास (नारा पार):- इस परिवार पर भी मामले में संलिप्तता और करोड़ों रुपये के घोटाले में भागीदारी का आरोप है।

क्या है पूरा घोटाला…..? (14 करोड़ का लोन स्कैम)

यह पूरा मामला केंद्र सरकार और नाबार्ड (NABARD) की ‘फूड प्रोसेसिंग फंड योजना’ से जुड़ा है।

प्रोजेक्ट का झांसा:- आरोपियों ने ‘निमाड़ एग्रो पार्क’ के नाम पर 31 करोड़ रुपये की एक वृहद परियोजना की रूपरेखा तैयार की थी।

अनुदान का खेल:- इस प्रोजेक्ट के माध्यम से सरकार से 10 करोड़ रुपये की सब्सिडी (Grant) हासिल करने की योजना थी।

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फर्जी दस्तावेजों का सहारा:- नाबार्ड ने परियोजना के लिए 13.99 करोड़ रुपये का लोन स्वीकृत किया था। आरोप है कि फर्जी एग्रीमेंट, गलत बैलेंस शीट और जाली दस्तावेजों के आधार पर बैंक से किश्तें जारी करवाई गईं।

फंड डायवर्जन और अधूरा प्रोजेक्ट

सीबीआई की प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि ऋण की राशि का उपयोग फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के बजाय निजी हितों के लिए किया गया। आरोपियों ने लोन की राशि को अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर (Round-tripping) कर दिया। धरातल पर यूनिट स्थापित करने का काम आज भी अधूरा है, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगा है।

सरकारी मिलीभगत की आशंका

सीबीआई की रडार पर केवल व्यापारी ही नहीं, बल्कि सरकारी अधिकारी भी हैं। जांच एजेंसी इस बिंदु पर गौर कर रही है कि बिना किसी ‘फिजिकल वेरिफिकेशन’ (भौतिक सत्यापन) के बैंक ने इतनी बड़ी राशि की किश्तें कैसे जारी कर दीं। आशंका जताई जा रही है कि नाबार्ड या संबंधित विभागों के अफसरों ने कमीशन के बदले इस घोटाले को हरी झंडी दिखाई।

डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेजों की जब्ती

कार्रवाई के दौरान पुलिस बल की तैनाती के साथ घरों को पूरी तरह सील कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, सीबीआई की टीम वर्तमान में निम्नलिखित साक्ष्य जुटा रही है:

 

* लैपटॉप, मोबाइल और हार्ड डिस्क जैसे डिजिटल उपकरण।

* बैंक पासबुक और ट्रांजैक्शन डिटेल्स।

* बेनामी संपत्ति के कागजात और एग्रो पार्क से जुड़े मूल दस्तावेज।