गौमाता को दी अंतिम विदाई, 25 वर्षों तक परिवार का हिस्सा रहीं गाय का विधि-विधान से किया अंतिम संस्कार
हरदा। जिले के ग्राम कालकुंड में मानवता, गौसेवा और सनातन संस्कृति का भावुक उदाहरण देखने को मिला। गांव के बद्री प्रसाद जी करोड़े के परिवार में पिछले 25 वर्षों से रह रही गौमाता का निधन होने पर पूरे परिवार ने हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार उनका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि गौमाता बचपन से ही उनके घर में थीं और परिवार के हर सदस्य का उनसे गहरा भावनात्मक लगाव था। गौमाता के निधन से पूरे परिवार में शोक का माहौल रहा। अंतिम विदाई के समय गाय को साड़ी ओढ़ाकर, फूल-मालाओं से सजाकर और अगरबत्ती अर्पित कर पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
गौमाता का अंतिम संस्कार ग्राम कालकुंड की काली माचक नदी के किनारे किया गया। इस अवसर पर परिवार ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए अंतिम संस्कार स्थल पर पांच पौधे लगाने का संकल्प लिया। साथ ही पुण्य स्मृति में ग्राम की कन्याओं को भोजन (कन्या भोज) भी कराया गया।
इस अनूठे और प्रेरणादायक कार्य में गांव के अनेक युवाओं ने भी सक्रिय सहयोग दिया। कार्यक्रम में मनीष गुर्जर (जनपद सदस्य), जयदीप, आशुतोष, नीलेश, केदार, अंकुर, बनबारी, सचिन, ज्ञानेश, कृष्णा, अरविंद, अखिलेश, नट्टू, सुरेश, बाबा सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।
गांव में गौमाता को दी गई इस सम्मानजनक अंतिम विदाई की हर ओर सराहना हो रही है। यह आयोजन न केवल गौसेवा और भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था का प्रतीक बना, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहभागिता का भी प्रेरणादायक संदेश दे गया।

