हरदा जिले के खिरकिया और टिमरनी विकासखंडों के लिए दो लाख 40 हजार रुपये की फ्लेक्सिबल फंड राशि आवंटित
हरदा : मानसून के दौरान बाढ़ और जलभराव से दूरस्थ ग्राम पंचायतों की सड़क संपर्क व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति में गर्भवती महिलाओं एवं बीमार नवजात शिशुओं को समय पर स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक परिवहन की व्यवस्था की जाएगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन डायरेक्टर डॉ. सलोनी सिडाना ने कलेक्टर सिद्धार्थ जैन को पत्र भेजकर इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
पत्र में बताया गया है कि पिछले दो वर्षों में सामने आए मातृ एवं नवजात मृत्यु के मामलों के विश्लेषण में हरदा जिले के खिरकिया और टिमरनी विकासखंडों को संवेदनशील क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में होने वाली देरी से मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना रहती है।
आपातकालीन रेफरल सेवाओं को मजबूत करने के लिए दोनों चिन्हित विकासखंडों में प्रति विकासखंड एक लाख 20 हजार रुपये कुल 2 लाख 40 हजार रूपये की फ्लेक्सिबल फंड राशि आवंटित की गई है। इस राशि का उपयोग मानसून के दौरान नियमित एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं होने पर गर्भवती महिलाओं और बीमार नवजातों के लिए वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था करने में किया जाएगा।
स्थानीय स्तर पर होगी परिवहन व्यवस्था
निर्देशों के अनुसार क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, पहुंच और उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए परिवहन का माध्यम स्थानीय स्तर पर तय किया जाएगा। गर्भवती महिलाओं और नवजातों को निकटतम उपयुक्त स्वास्थ्य संस्थान तक सुरक्षित एवं समय पर पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
परिवहन व्यवस्था आपात स्थिति में तत्काल उपलब्ध रहेगी। इसके लिए प्रत्येक विकासखंड एवं संबंधित ग्राम पंचायत में नोडल व्यक्ति नामित किया जाएगा, जिससे जरूरतमंद परिवार संपर्क कर तत्काल परिवहन की सुविधा प्राप्त कर सकें। चिन्हित ग्राम पंचायतों में इस व्यवस्था का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा।
बर्थ वेटिंग होम में समय पर पहुंचाने के निर्देश
पत्र में दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों की पात्र गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान कर उन्हें निकटतम बर्थ वेटिंग होम में भर्ती कराने पर भी जोर दिया गया है। प्रसव की संभावित तिथि से पहले उन्हें बर्थ वेटिंग होम तक पहुंचाने के साथ ही आवश्यकता पड़ने पर आपातकालीन स्थिति में भी सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस व्यवस्था से मानसून के दौरान मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने तथा रोकथाम योग्य मातृ एवं नवजात मृत्यु के मामलों में कमी लाने में मदद मिलेगी।

