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चाइल्ड लाइन 1098 जागरूकता अभियान के तहत छात्राओं को गुड टच-बैड टच और बाल विवाह के दुष्परिणामों की दी जानकारी

हरदा : जिला कार्यक्रम अधिकारी विवेक शर्मा के नेतृत्व में ‘चाइल्ड लाइन 1098 प्रचार-प्रसार (जागरूकता) अभियान 2026‘ के अंतर्गत बुधवार को शासकीय सांदीपनी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय करताना व शासकीय माध्यमिक विद्यालय तजपुरा में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसी प्रकार 8 सितम्बर को सिराली के पीएम  शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय एवं शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में भी कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में छात्र-छात्राएं और शिक्षक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में चाइल्ड लाइन टीम की सदस्य दिव्या राजपूत ने बच्चों को ‘गुड टच और बैड टच‘ के बारे में विस्तार से बताया। इसके साथ ही उन्होंने बाल विवाह के बारे में बताया कि यदि लड़के की उम्र 21 वर्ष और लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम है, तो उनका विवाह कानूनन बाल विवाह की श्रेणी में आता है।

उन्होंने बाल विवाह के गंभीर दुष्परिणामों के प्रति सचेत करते हुए कहा कि इससे बच्चों की शिक्षा रुक जाती है, घरेलू हिंसा के मामले बढ़ते हैं, मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और जीवन में आगे बढ़ने के अवसर सीमित हो जाते हैं।

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चाइल्ड लाइन के आशीष जोशी ने बालश्रम के बारे में बताते हुए कहा कि बाल मजदूरी बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास के लिए अत्यंत हानिकारक है। इससे बच्चों से उनका शिक्षा का अधिकार छिन जाता है और वे कुपोषण व गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाते हैं।

खतरनाक परिस्थितियों में काम करने से शारीरिक शोषण और जान का खतरा भी बना रहता है, जो गरीबी के दुष्चक्र को और बढ़ाता है। इसी क्रम मे रविराज राजपूत ने बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 की महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि 1098 भारत सरकार के महिला और बाल विकास मंत्रालय के तहत संचालित एक टोल-फ्री, आपातकालीन फोन नंबर है,

जो मुसीबत में फंसे बच्चों की मदद के लिए चौबीसों घंटे काम करता है। कोई भी संकटग्रस्त बच्चा या उसके लिए चिंतित नागरिक बाल विवाह, बाल मजदूरी या किसी भी प्रकार के शोषण की शिकायत के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकता है।

यह सेवा पूरे भारत के 600 से अधिक जिलों और प्रमुख रेलवे व बस स्टेशनों पर उपलब्ध है, जिसके माध्यम से पीड़ित बच्चों को त्वरित चिकित्सा, आश्रय, कानूनी सहायता और काउंसलिंग प्रदान की जाती है। इस जागरूकता अभियान में विभाग के अधिकारी कर्मचारी, स्कूल के प्राचार्य, समस्त स्कूल स्टाफ और बच्चे मुख्य रूप से उपस्थित रहे।