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राजस्थान नगर निकाय चुनाव 2026 – समीक्षा

मतदाता का फैसला नही यह सत्ता को सीधे चेतावनी

बीजेपी कांग्रेस को भारी चोट निर्दलीय और छोटे दलों का कद बढा़

ताजा नतीजे एक नजर में

राजस्थान के 309 नगरीय निकायों (10 नगर निगम, 47 नगर परिषद, 252 नगर पालिका) के 10,167 वार्डों के लिए 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में वोट डाले गए थे। 14 सितंबर को मतगणना हुई।

फाइनल आंकड़ा राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार:

– BJP: 4,179 वार्ड (41%)

– Congress: 3,613 वार्ड (35%)

– निर्दलीय: 2,273 वार्ड (22%)

– RLP: 63, AAP: 42, CPI(M): 38, BSP: 19, BAP: 8

252 नगरपालिकाओं में BJP ने 144 और Congress ने 92 में बोर्ड बनाया, 47 नगर परिषदों में BJP 21, Congress 17 और निर्दलीय 9 में जीते।

मतदाता का फैसला नही यह सत्ता को सीधे चेतावनी

इस चुनाव ने BJP और Congress दोनों को अपना आईना दिखा दिया है। BJP भले ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन 41% वोट-शेयर पर सिमटना और सत्ता में होने के बावजूद 566 वार्ड की मामूली बढ़त, ये बताता है कि शहरी मतदाता नाराज है। कांग्रेस 35% पर सिमटी है, पिछले चुनाव से लगभग 5% की गिरावट।

मतदाता ने साफ संदेश दिया है – आप धरातल पर काम नहीं करोगे, तो मतदाता आपको धरातल पर ला पटकेगा। जयपुर में 4 वार्डों के परिणाम रोकने पर हंगामा, पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल का वार्ड 110 में 2706 वोटों से हारना, और डीडवाना के परबतसर वार्ड 13 में BJP प्रत्याशी को सिर्फ 1 वोट मिलना – ये सब सत्ता विरोधी गुस्से के प्रतीक हैं।

BJP का प्रदर्शन – बड़े शहरों में वापसी,लेकिन अपने गढ़ में हार

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जहां जीती – जयपुर, कोटा, उदयपुर, भीलवाड़ा नगर निगम में BJP ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया। छोटे कस्बों और आदिवासी बेल्ट में BJP को बड़ी सफलता मिली है। 881e

यहां से हारी – बीजपी को झटका खास लोगो के क्षेत्र से हारी सबसे बड़ा झटका झालावाड़ में लगा। वसुंधरा राजे के गढ़ में 45 में से 29 वार्ड कांग्रेस जीत गई, BJP 13 पर सिमट गई। यहां तक कि पूर्व सभापति संजय शुक्ला का अपना वार्ड 39 भी BJP नहीं बचा पाई।

बीकानेर – केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के क्षेत्र में भी BJP को बड़ी हार झेलनी पड़ी। बीकानेर नगर निगम कांग्रेस ने जीता। 4b79

कांग्रेस की स्थिति – कुछ गढ़ बचे, बाकी में टक्कर

कांग्रेस ने बीकानेर नगर निगम में बहुमत जीता। अजमेर और पाली में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत से चूकी। जोधपुर में BJP और कांग्रेस दोनों को बराबर सीटें मिलीं। टोडाभीम (करौली) में कांग्रेस 14 और BJP 6, बाकी 15 निर्दलीय जीते।

असली किंगमेकर – निर्दलीयों का कद बड़ा

इस चुनाव का सबसे बड़ा हीरो निर्दलीय है। 2,273 वार्ड जीतकर इन्होंने साबित कर दिया कि जनता अब पार्टी सिंबल से ज्यादा स्थानीय चेहरे पर भरोसा करती है।

– भरतपुर, अलवर, जोधपुर, अजमेर, पाली – इन 5 नगर निगमों में किसी को बहुमत नहीं, निर्दलीय तय करेंगे मेयर कौन बनेगा।

– अलवर में BJP 28 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन बहुमत के लिए 13 निर्दलीयों पर निर्भर।

किसान बहुल इलाकों में निर्दलीयों ने सबसे ज्यादा ताकत दिखाई।

यह ट्रेंड BJP-Congress दोनों के लिए खतरे की घंटी है। टिकट बंटवारे में स्थानीय कार्यकर्ताओं की अनदेखी का नतीजा है कि बागी निर्दलीय बनकर जीत गए।

छोटे दलों की हुई एंट्री

RLP, AAP, CPI(M) और BSP ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। AAP ने 42 वार्ड जीते, खासकर शहरी युवाओं में पकड़ बनाई। परिसीमन के कारण 2,770 नए वार्ड जुड़े थे, इसलिए इस बार 10,244 वार्डों पर चुनाव हुआ, जो 2019 में 7,500 ही थे। अब आगे क्या….?

21 सितंबर को मेयर / सभापति / चेयरमैन का चुनाव होगा और 22 सितंबर को डिप्टी मेयर का चुनाव होगा। जिन निकायों में त्रिशंकु स्थिति है, वहां निर्दलीयों की बोली सबसे ऊंची रहेगी।