हरदा, / जिले में बिना सक्षम अनुमति कृषि भूमि पर अवैध रूप से प्लॉट काटकर बेचने और कॉलोनी विकसित करने के मामलों में कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी सिद्धार्थ जैन ने कड़ा रुख अपनाया है।
कलेक्टर न्यायालय ने तीन प्रकरणों में संबंधित अनावेदकों के विरुद्ध प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने, अवैध विकास एवं निर्माण हटाने तथा भूमि पर नए निर्माण और भूखंडों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
जांच में सामने आया कि संबंधित कृषि भूमियों पर सक्षम प्राधिकारी की अनुमति, टीएनसीपी ले-आउट स्वीकृति तथा रेरा पंजीयन के बिना छोटे-छोटे भूखंड काटकर आवासीय प्रयोजन के लिए अलग-अलग व्यक्तियों को बेचे गए। इन मामलों में मौके पर सड़क, नाली एवं अन्य विकास कार्य किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
ईमलीपुरा में 24 भूखंडों की बिक्री
वार्ड नंबर 21, ईमलीपुरा निवासी कृष्णा बाई पति जगन्नाथ प्रजापति के प्रकरण में मौजा कुलहरदा स्थित खसरा नंबर 145/1 रकबा 0.341 हेक्टेयर, 145/2 रकबा 0.202 हेक्टेयर एवं 145/3 रकबा 0.603 हेक्टेयर कृषि भूमि पर बिना आवश्यक अनुमति 24 भूखंड अलग-अलग व्यक्तियों को बेचे गए। राजस्व, पटवारी एवं उप-पंजीयक की जांच रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर न्यायालय ने इसे अवैध कॉलोनाइजेशन मानते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
दुधकच्छखुर्द में 25 प्लॉट काटकर बेचने का मामला
वार्ड नंबर 14 हरदा निवासी मुर्तजा खां पिता रमजान खां के प्रकरण में मौजा दुधकच्छखुर्द स्थित खसरा नंबर 86/3 की 0.6299 हेक्टेयर कृषि भूमि पर बिना सक्षम अनुमति 25 प्लॉट काटकर बेचे जाने का मामला सामने आया।
जांच में मौके पर मुरम डालकर रास्ता बनाए जाने तथा 3 पक्के और 2 कच्चे मकान निर्मित किए जाने की जानकारी भी मिली। कलेक्टर न्यायालय ने संबंधित के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने तथा अवैध विकास एवं निर्माण हटाने के निर्देश दिए हैं।
कुलहरदा में 7 भूखंडों की बिक्री
इसी प्रकार वार्ड नंबर 23 हरदा निवासी ईशाक खान पिता मोहम्मद हनीफ खान के प्रकरण में मौजा कुलहरदा स्थित खसरा नंबर 216/1 की 0.5166 हेक्टेयर भूमि में से बिना सक्षम अनुमति, टीएनसीपी ले-आउट स्वीकृति और रेरा पंजीयन के 7 छोटे भूखंड अलग-अलग व्यक्तियों को बेचे गए। स्थल निरीक्षण, पटवारी प्रतिवेदन एवं पंजीबद्ध दस्तावेजों के आधार पर कलेक्टर न्यायालय ने मामले को अवैध कॉलोनाइजेशन की श्रेणी में माना।
तीनों मामलों में FIR और अवैध निर्माण हटाने के निर्देश
कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने तीनों प्रकरणों में मुख्य नगरपालिका अधिकारी, नगरपालिका परिषद हरदा को संबंधित अनावेदकों के विरुद्ध पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए अधिकृत किया है। साथ ही तहसीलदार हरदा एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी को संबंधित भूमि पर किए गए अवैध विकास एवं निर्माण कार्य हटाने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
संबंधित भूमि पर बिना अनुमति नए निर्माण, सड़क एवं नाली निर्माण तथा भूखंडों की खरीद-बिक्री अथवा विक्रय अनुबंध पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगाई गई है। उप-पंजीयक कार्यालय को आवश्यक सूचना देने के साथ ही समाचार पत्रों एवं अन्य माध्यमों से सार्वजनिक सूचना जारी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आमजन ऐसी अवैध कॉलोनियों में भूखंड खरीदने से सावधान रहें।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना सक्षम अनुमति कृषि भूमि पर कॉलोनी विकसित करने अथवा भूखंडों की अनधिकृत खरीद-बिक्री करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

