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MP के इस गांव में गाली-मुक्त अभियान, जुबान से गलती होने पर तुरंत एक्शन

बुरहानपुर। बुरहानपुर का बोरसर गांव इस बार किसी त्योहार से नहीं, संस्कारों की सुनामी से सुर्खियों में है! एमपी का पहला गाली-मुक्त मॉडल गांव बनने के बाद यहां की हवा में अब गालियां नहीं, संस्कारों की खुशबू बह रही है। यहां सड़कों पर कदम रखते ही साफ लिखा मिलता है, गाली की एंट्री बैन…

यदि कोई व्यक्ति गाली देता पकड़ा जाता है, तो उस पर 500 rs का जुर्माना लगाया जाता है और साथ ही एक घंटे तक गांव की सफाई करने की सजा भी दी जाती है। इसका मतलब एकदम ऑन-द-स्पॉट एक्शन होता है। चाहे आम आदमी हो या कोई प्रभावशाली रसूखदार गाली दी तो कार्रवाई होना तय है।

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क्या बोले गांव वाले?
गांव वासियों ने बताया कि इससे बहुत लाभ मिल रहा है, अगर ये सब रुक जाए तो अच्छा है। गाली गलौच से तो बहुत से झगड़े भी होते हैं, लड़ाई होती है उसको अगर रुकवा देंगे तो अपना गांव देश अच्छा बन जाएगा. हम बिलकुल इस नियम के साथ हैं, जब ये मुद्दा उठाया गया था तो हमने तभी से इसे मानने का मन बना लिया था।

स्पेशल फोर्स भी बनाई गई
गांव के युवा अब ‘गाली पकड़ो स्पेशल फोर्स’ की विशेष टीम का हिस्सा बन गए हैं। यह टीम निगरानी रखती है और नियम तोड़ने वालों पर तुरंत कार्रवाई करती है। किसी ने गलती की, तो ये टीम वैसे ही पकड़ेगी जैसे पुलिस मोस्ट वांटेड को पकड़ती है। ग्राम पंचायत और समाजसेवी अश्विन पाटिल के इस नवाचार ने गांव की सोच का असली अपग्रेशन कर दिया है। बच्चों की जुबान से गालियां गायब और उनकी जगह किताबों की खुशबू महक रही है।

गांव की इस पहल से शहर भी शर्मिंदा
गांव वालों का कहना है कि गांव में खुला नया पुस्तकालय अब संस्कारों की ऊर्जा फैला रहा है। आज बोरसर सिर्फ गांव नहीं, सचमुच संस्कारों की प्रयोगशाला बन चुका है, जहां से उठी यह क्रांति बड़े शहरों को भी शर्मिंदा कर रही है।