खबरें छपीं, ज्ञापन दिए गए, लेकिन कब्जाधारियों पर अब तक नहीं चली कार्रवाई
दुकानदारों का फूटा गुस्सा — “क्या रसूखदारों के आगे बेबस है प्रशासन?”
हंडिया। बस स्टैंड मार्केट में अतिक्रमण का मुद्दा अब सिर्फ सड़क और दुकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है। लगातार शिकायतें, ज्ञापन और खबरें प्रकाशित होने के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। इससे व्यापारियों और आमजन में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
स्थानीय दुकानदार सचिन तिवारी, राहुल जाणी और अन्य का आरोप है कि बाजार क्षेत्र में कुछ प्रभावशाली लोगों ने दुकानों के सामने कई-कई फीट तक टीन शेड बढ़ाकर सरकारी जमीन पर स्थायी कब्जा जमा लिया है। इतना ही नहीं, इन शेडों के नीचे सामान, पाउच और व्यापारिक सामग्री लटकाकर रास्तों को संकरा कर दिया गया है, जिससे राहगीरों और ग्राहकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उक्त व्यापारियों का कहना है कि छोटे दुकानदारों पर नियमों का डंडा चलाया जाता है, लेकिन रसूखदार अतिक्रमणकारियों के खिलाफ प्रशासन पूरी तरह खामोश नजर आता है। यही वजह है कि अब लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर कार्रवाई रुक क्यों रही है?
कलेक्टर के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद व्यापारियों को उम्मीद थी कि प्रशासन सख्त कदम उठाएगा, लेकिन कई दिन बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
धार्मिक नगरी हंडिया में अमावस्या और पर्वों पर हजारों श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। ऐसे में बाजार की संकरी होती सड़कें और बढ़ता अतिक्रमण कभी भी बड़े हादसे की वजह बन सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी, तो हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं।
दुकानदारों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। बाजार बंद और उग्र प्रदर्शन तक की रणनीति बनाई जा रही है।
व्यापारियों की प्रमुख मांगें
टीन शेड के नाम पर किए गए सभी अतिक्रमण तत्काल हटाए जाएं
बाजार क्षेत्र को व्यवस्थित कर आमजन के लिए रास्ता खाली कराया जाए
कार्रवाई में भेदभाव बंद कर सभी पर समान नियम लागू किए जाएं
अतिक्रमण हटाओ अभियान को दिखावा नहीं, सख्त कार्रवाई बनाया जाए
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस बढ़ते जनाक्रोश को गंभीरता से लेता है या फिर हंडिया का बाजार यूं ही कब्जों की भेंट चढ़ता रहेगा।

