मप्र भोपाल आस पास गर्मी का कहर
हीट वेब से दिमाग की नसों में जम रहा खून
मकडा़ई एक्सप्रेस 24 भोपाल। राजधानी और आस पास के क्षेत्र में लगातार 43 डिग्री से ऊपर जा रहा पारा अब सिर्फ धूप में निकलने वालों को ही नहीं, घर के अंदर रहने वालों को भी बीमार कर रहा है।
अस्पतालों में चक्कर, उल्टी, डिहाइड्रेशन और बेहोशी के मरीज तेजी से बढ़े हैं। गर्मी को लेकर अलर्ट जारी, हीट स्ट्रोक के केस अस्पतालों के लिए हेल्थ इमरजेंसी बन गए हैं।
20% हीट स्ट्रोक मरीजों में ‘सीवीटी’ का खतरा
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. आयुष दुबे ने चेतावनी दी कि *हीट स्ट्रोक के 100 में से 20 मरीजों में सेरेब्रल वेनस थ्रोम्बोसिस (CVT) यानी दिमाग की नसों में खून जमने की स्थिति* सामने आ रही है। समय पर इलाज न मिलने पर स्ट्रोक या ब्रेन हेमरेज हो सकता है।
सीवीटी क्या है.. ?
जब शरीर का तापमान 40 डिग्री के पार जाता है तो पसीने से पानी-नमक तेजी से निकलता है। डिहाइड्रेशन से खून गाढ़ा हो जाता है और दिमाग से खून वापस दिल तक ले जाने वाली ‘वेनस साइनस’ नसों में ब्लॉकेज हो जाता है। इससे दिमाग में प्रेशर बढ़ता है और नस फटने से ब्रेन हेमरेज का खतरा रहता है।
अस्पतालों में बिगड़े हालात
जेपी अस्पताल रोज 50+ मरीज गर्मी से जुड़ी शिकायत लेकर पहुंच रहे।
हमीदिया न्यूरोलॉजी विभाग CVT के केस 4 गुना बढ़े।
हीट स्ट्रोक OPD आंकड़े
एम्स मंगलवार 5793, बुधवार 3824
हमीदिया: मंगलवार 2921, बुधवार 2841
जेपी मंगलवार 2604, बुधवार 2012
सावधान ये संकेत न करें नजरअंदाज
डॉ. रचना दुबे, कैलाश नाथ काटजू मातृ एवं शिशु संस्थान, के अनुसार अब ‘इंडोर हीट स्ट्रोक’ के मामले बढ़ रहे हैं। उमस, बंद कमरे, खराब वेंटिलेशन और बिजली कटौती बड़ी वजह है।
CVT के लक्षण
1. लगातार सिरदर्द जो दवा से भी ठीक न हो
2. उल्टी या जी मिचलाना
3. अचानक तेज उल्टियां होना
4. धुंधला दिखाई देना, अंधेरा छाना या डबल विजन
5. दौरे या बेहोशी, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी
सबसे ज्यादा खतरा: बुजुर्ग, छोटे बच्चे, डायबिटीज और हृदय रोगियों को।
✅ बचाव के 3 जरूरी उपाय
1. हर घंटे 1-2 गिलास पानी पिएं, दिनभर में 4 लीटर लिक्विड लें।
2. पानी के साथ नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और ORS लेते रहें।
3. दोपहर 12 से 4 बजे तक धूप से बचें, बाहर निकलें तो सिर-कान ढकें।
स्वास्थ्य विभाग ने हीट स्ट्रोक को हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर सभी अस्पतालों में विशेष वार्ड बनाने के निर्देश दिए हैं। डॉक्टरों ने कहा कि शुरुआती स्टेज में ब्लड थिनर दवाओं से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है।
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