DGP शत्रुजीत कपूर समेत 14 अफसरों पर एफआईआर दर्ज
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 चंडीगढ़। हरियाणा के चर्चित आईपीएस वाई पूरन कुमार आत्महत्या मामले में अब बड़ा मोड़ आ गया है। पुलिस ने इस केस में डीजीपी शत्रुजीत कपूर समेत 14 वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। यह मामला आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी एक्ट के प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया है।
हरियाणा पुलिस के अधिकारी वाई पूरन कुमार द्वारा कथित तौर पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या करने के एक दिन बाद उनकी पत्नी ने बुधवार को दावा किया कि पूरन की मौत उच्च पदस्थ अधिकारियों की ओर से सुनियोजित उत्पीड़न किए जाने के कारण हुई।बताया जा रहा है कि पीड़ित परिवार के लगातार विरोध और मुख्यमंत्री की सक्रिय हस्तक्षेप के बाद यह कार्रवाई की गई।
क्या थी घटना
आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार ने विगत दिनो रहस्यमय परिस्थितियों में आत्महत्या कर ली थी।
वाई पूरन कुमार 2001 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी थे और वह मंगलवार को चंडीगढ़ स्थित अपने आवास में मृत पाए गए थे। परिवार ने आरोप लगाया था कि विभागीय उत्पीड़न और उच्च अधिकारियों के दबाव के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। परिवार ने कई वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रताड़ना और जातिगत भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए थे।
दर्ज एफआईआर में शामिल अधिकारी
एफआईआर में जिन 14 अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं, उनमें कई बड़े पदों पर तैनात अफसर हैं।
शत्रुजीत कपूर – डीजीपी हरियाणा
अमिताभ ढिल्लों – एडीजीपी
संजय कुमार – एडीजीपी (1997 बैच)
पंकज नैन – आईजीपी (2007 बैच)
कला रामचंद्रन – आईपीएस (1994 बैच)
संदीप खिरवार – आईपीएस (1995 बैच)
सिबाश कविराज – आईपीएस (1999 बैच)
मनोज यादव – पूर्व डीजीपी (1988 बैच)
पी.के. अग्रवाल – पूर्व डीजीपी (1988 बैच)
टी.वी.एस.एन. प्रसाद – आईएएस (1988 बैच)
नरेंद्र बिजारणिया – एसपी रोहतक
राजीव अरोड़ा – पूर्व एसीएस
कुलविंदर सिंह – आईजी मधुवन
माटा रवि किरन – एडीजीपी, करनाल रेंज
सरकार और पुलिस की प्रतिक्रिया
एफआईआर दर्ज होने के बाद हरियाणा पुलिस मुख्यालय में हलचल मच गई है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं और एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की तैयारी चल रही है। वहीं विपक्ष ने इसे “सिस्टम की असफलता” बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है।
पीड़ित परिवार की मांग
मृतक आईपीएस पूरन कुमार के परिजनों ने कहा कि “हमें देर से ही सही, लेकिन न्याय की दिशा में कदम उठाया गया है।” उन्होंने मांग की है कि जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो और दोषियों को सख्त सजा दी जाए।
मामले मे अब आगे क्या हो सकता ?
मामला बहुत ही संगीन है देश में पहली बार ऐसा हुआ की इतने अधिकारियो पर एक साथ मामला दर्ज हुआ है। एफआईआर के बाद अब पुलिस द्वारा सभी अधिकारियों के बयान दर्ज किए जाएंगे। इस केस को राज्य की सबसे संवेदनशील जांच में से एक माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इससे जुड़े कई बड़े खुलासे होने की संभावना

