I-PAC रेड के बाद ED और ममता सरकार आमने-सामने, गिरफ्तारी की आहट और कानूनी जंग तेज
*मकड़ाई एक्सप्रेस 24कोलकाता/नई दिल्ली*। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC और इसके निदेशक प्रतीक जैन के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी ने राज्य और केंद्र के बीच चल रहे संघर्ष को चरम पर पहुँचा दिया है। इस मामले में अब न केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप लग रहे हैं, बल्कि कानूनी पेचीदगियों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलों को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
ED का पलड़ा भारी: PMLA की धारा 67 और सबूतों का मामला
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, PMLA (Prevention of Money Laundering Act) की धारा 67 के तहत जांच एजेंसी को तलाशी और जब्ती के दौरान व्यापक अधिकार प्राप्त हैं। इस मामले में ईडी का पक्ष इसलिए मजबूत माना जा रहा है क्योंकि एजेंसी ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख करते हुए आरोप लगाया है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद हस्तक्षेप किया और महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य (हार्ड डिस्क और फाइलें) अपने साथ ले गईं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि “सबूतों को नष्ट करने” या “जांच में बाधा डालने” का आरोप सिद्ध होता है, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम की तुलना अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन के मामलों से की जा रही है, जहाँ जांच में सहयोग न करने या बाधा डालने जैसे आरोपों के बाद गिरफ्तारी की स्थिति बनी थी।
ममता बनर्जी का जवाबी हमला: देश के इतिहास में “अभूतपूर्व” कदम
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने ईडी की कार्रवाई को “राजनीतिक डकैती” करार देते हुए कोलकाता के शेक्सपियर सरणी और विधाननगर थाने में प्रवर्तन निदेशालय के खिलाफ ही अभियोग (FIR) दर्ज करा दिया है।
सीएम ने लगाया ED पर चोरी का आरोप
ममता बनर्जी का आरोप है कि ईडी के अधिकारी जांच के नाम पर उनकी पार्टी (TMC) के गोपनीय चुनावी दस्तावेज और आगामी चुनाव की रणनीतियां चुराने आए थे।
इतिहास में पहली बार
देश के इतिहास में यह संभवतः पहला मामला है जब किसी राज्य की मुख्यमंत्री ने छापेमारी करने वाली केंद्रीय एजेंसी के खिलाफ खुद थाने जाकर एफआईआर दर्ज कराई हो।
दिल्ली में हाई-लेवल बैठक: क्या होगा अगला कदम ?
कोलकाता में हुए इस हंगामे के बाद दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय में हलचल तेज हो गई है। आज ईडी के शीर्ष अधिकारी राहुल नवीन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कोलकाता के जांच अधिकारियों की एक वर्चुअल बैठक प्रस्तावित है।
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में छापेमारी के दौरान हुए “हस्तक्षेप” की रिपोर्ट साझा की जाएगी और आगे की कानूनी रणनीति तय होगी। माना जा रहा है कि ईडी जल्द ही सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में ममता बनर्जी के खिलाफ “साक्ष्य मिटाने” के आरोप में सख्त कार्रवाई की मांग कर सकती है।
मामला क्या है ?
यह पूरी कार्रवाई कोयला घोटाला (Coal Scam) और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी है। ईडी का दावा है कि कोयला तस्करी से हुई अवैध कमाई का एक बड़ा हिस्सा हवाला के जरिए I-PAC तक पहुँचा है, जिसका उपयोग चुनावों में किया गया। इसी कड़ी में प्रतीक जैन के घर और दफ्तर पर छापेमारी की गई थी।
अब आगे क्या हो सकता ?
बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति की दिशा तय करेगा। क्या ममता बनर्जी का यह दांव उन्हें ‘विक्टिम कार्ड’ खेलने में मदद करेगा या ईडी की धाराएं उन पर कानूनी शिकंजा कसेंगी, यह आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।

