मप्र की राजनीति में दिग्विजय सिंह का बड़ा बयान
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर बड़ा बयान देकर सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। आईएएस संतोष वर्मा के विवादित बयान के मामले में उनकी प्रतिक्रिया से लेकर आगामी चुनाव के लिए कांग्रेस के नए एजेंडे तक, दिग्विजय सिंह ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर खुलकर अपनी बात रखी।
संतोष वर्मा का समर्थन और सामाजिक आत्मचिंतन
हाल ही में आईएएस संतोष वर्मा के बयान पर मचे बवाल के बीच दिग्विजय सिंह ने दबी जुबान में उनका बचाव किया है। उन्होंने कहा, “यह देखना जरूरी है कि उन्होंने किस संदर्भ में बात कही है। स्पष्टीकरण तो आ ही चुका है, लेकिन असली चिंता का विषय यह है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के भीतर ऐसी भावनाएं क्यों पनप रही हैं। अगर कहीं कमी है, तो वह हम नेताओं और व्यवस्था में ही होगी।”
‘दलित या आदिवासी हो अगला मुख्यमंत्री’
कांग्रेस की भावी योजनाओं पर चर्चा करते हुए दिग्विजय सिंह ने एक बड़ी इच्छा जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आगामी चुनावों के बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है, तो उन्हें बेहद खुशी होगी अगर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अनुसूचित जाति या जनजाति वर्ग का कोई व्यक्ति बैठे। उनके इस बयान को दलित और आदिवासी वोट बैंक को साधने की एक बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
13 जनवरी 2027: ‘भोपाल डिक्लेरेशन 2’ की तैयारी
दिग्विजय सिंह ने जानकारी दी कि 13 जनवरी 2027 को ‘भोपाल डिक्लेरेशन 2’ जारी किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल दलित एजेंडा नहीं है, बल्कि इसमें आदिवासियों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा गया है।
ऐतिहासिक संदर्भ बताया
उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस शासन और इमरजेंसी के दौरान ही एससी-एसटी वर्ग के लोगों को गैस एजेंसियां और पेट्रोल पंप आवंटित किए गए थे। मध्य प्रदेश चैप्टर का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और सुझावों के लिए भाजपा विधायकों को भी आमंत्रित किया गया है।
Gen Z और युवाओं पर विशेष फोकस
कांग्रेस अब अपनी रणनीति में पीढ़ीगत बदलाव (Generational Shift) ला रही है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि अब समय आ गया है कि उन युवाओं से बात की जाए जो साल 2000 के बाद पैदा हुए हैं (Gen Z)। पार्टी एक नई ‘यूथ पॉलिसी’ पर काम कर रही है।
बिना टेंडर काम: उन्होंने 2002-03 के अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय डिप्लोमा और डिग्री होल्डर्स को बिना टेंडर के काम देने की शुरुआत की गई थी, जिसे फिर से प्रभावी बनाया जा सकता है।
2002 के एजेंडे और पट्टा अभियान पर स्पष्टीकरण
जब उनसे पूछा गया कि क्या 2002 का एजेंडा विफल रहा था, तो उन्होंने कहा कि डेढ़ साल का समय सरकार के लिए बहुत कम होता है। उन्होंने जोर देकर कहा दबंगों के कब्जे से जमीन छुड़ाकर गरीबों को पट्टे दिए गए थे।
बीजेपी पर निशाना साधते उन्होने कहा कि कांग्रेस सरकार जाने के बाद कई गरीबों के पट्टे निरस्त कर दिए गए थे। कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने उन पट्टों को वापस दिलाने के लिए बड़ा अभियान चलाया था।

