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ब्रह्मांडीय उथल-पुथल: 2026 के ग्रहीय गोचर और बदलती वैश्विक व्यवस्था

भविष्यवाणी-

कई देशो में होगा सीमा को लेकर विवाद

समुद्री व्यापार मार्गों पर तनाव बढ़ेगा

कई देशों के बीच होगा ‘प्रॉक्सि वॉर’ और साइबर हमला

दिखेगा प्रकृति के उग्र रूप समुद्री तूफान बारिश और संक्रामक बिमारी का संकेत

संभव है किसी बड़े नेता पर जानलेवा हमला

मकड़ाई एक्सप्रेस 24 ज्योतिष और अध्यात्म। वर्तमान समय (अप्रैल 2026) में अंतरिक्ष में ग्रहों की स्थिति कुछ ऐसी है जिसे ज्योतिष शास्त्र में ‘युगांतकारी’ माना जा रहा है। शनि, राहु और मंगल जैसे प्रभावशाली ग्रहों का मीन राशि में जमावड़ा और यूरेनस का राशि परिवर्तन वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और प्रकृति में बड़े बदलावों का संकेत दे रहे हैं।

मीन राशि में ग्रहों का जमावड़ा: संवेदनशीलता और संघर्ष का मिश्रण

इस समय मीन राशि (Pisces) में एक शक्तिशाली ‘स्टैलियम’ (कई ग्रहों का एक साथ होना) बना हुआ है। इसमें सूर्य, बुध, शुक्र और विशेष रूप से शनि की उपस्थिति है। मीन जल तत्व की राशि है और यहाँ शनि की उपस्थिति यह दर्शाती है कि दुनिया के तटीय क्षेत्रों और समुद्री व्यापार मार्गों पर तनाव बढ़ेगा।

बड़ेगा साईबर क्राईम

ज्योतिषीय दृष्टि से, मीन राशि कालपुरुष की कुंडली का 12वां भाव है, जो व्यय, हानि और गुप्त शत्रुओं का प्रतीक है। यही कारण है कि वर्तमान में कई देशों के बीच ‘प्रॉक्सिा वॉर’ और साइबर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। देशों के बीच पर्दे के पीछे होने वाली कूटनीति अब निर्णायक मोड़ पर है।

यूरेनस का मिथुन में प्रवेश से तकनीकी क्रांति या संचार युद्ध ?

25 अप्रैल, 2026 को यूरेनस (Uranus) का मिथुन राशि में प्रवेश एक बड़ी खगोलीय घटना है। मिथुन संचार, तकनीक और सूचना का कारक है। यूरेनस के यहाँ आने से आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) और अंतरिक्ष विज्ञान में ऐसी खोजें हो सकती हैं जो मानव इतिहास को बदल देंगी।

डिजीटल डेटा का हो सकता दुरुपयोग

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हालांकि, इसका नकारात्मक पक्ष यह है कि सूचनाओं का गलत इस्तेमाल और डिजिटल डेटा की सुरक्षा एक बड़ा वैश्विक मुद्दा बन जाएगी। शेयर बाजार, विशेषकर टेक और क्रिप्टो सेक्टर में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव (Black Swan Events) देखने को मिल सकते हैं।

मंगल-शनि की युति: भू-राजनीतिक तनाव और सीमा विवाद

अप्रैल के इस महीने में मंगल और शनि की युति एक विस्फोटक स्थिति पैदा कर रही है। वैदिक ज्योतिष में इसे ‘द्वंद्व योग’ के समान माना जाता है। यह योग विशेष रूप से मध्य-पूर्व (Middle East) और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में सैन्य हलचल बढ़ने का संकेत देता है।

सीमा विवाद

एशिया और योरोप में पड़ोसी देशों के बीच सीमाओं को लेकर पुराने विवाद फिर से गहरा सकते हैं।

सत्ता परिवर्तन:

कई प्रमुख लोकतांत्रिक और साम्यवादी देशों में नेतृत्व को लेकर आंतरिक विद्रोह या अचानक सत्ता परिवर्तन के योग बन रहे हैं।

प्राकृतिक आपदाएं और जलवायु परिवर्तन

ज्योतिषीय तथ्यों के अनुसार, राहु और केतु का प्रभाव वर्तमान में जलीय और अग्नि तत्वों को असंतुलित कर रहा है। आने वाले कुछ महीनों में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में उच्च तीव्रता वाले भूकंप और समुद्री चक्रवातों की आवृत्ति बढ़ सकती है। वैज्ञानिकों द्वारा दी जा रही जलवायु परिवर्तन की चेतावनियां अब ज्योतिषीय समय-चक्र (Kala Sarpa influence) के साथ मेल खा रही हैं, जो प्रकृति के उग्र रूप की ओर इशारा करती हैं।

आर्थिक पुनर्गठन: पुरानी व्यवस्था का अंत

शनि और प्लूटो के प्रभाव के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था एक ‘ग्रेट रिसेट’ की ओर बढ़ रही है। पारंपरिक मुद्रा प्रणालियों (Currencies) पर दबाव बढ़ेगा और नई डिजिटल अर्थव्यवस्था अपनी जगह बनाएगी। यह समय निवेशकों के लिए “सतर्कता के साथ धैर्य” रखने का है, क्योंकि बाजार की अस्थिरता अभी कुछ और समय तक जारी रह सकती है।

निष्कर्ष: क्या है भविष्य का मार्ग ?

2026 का यह समय केवल संकट का नहीं, बल्कि ‘शुद्धिकरण’ का भी है। ज्योतिषीय गणनाएं बताती हैं कि जून 2026 के बाद जब बृहस्पति (Jupiter) का गोचर अनुकूल होगा, तब दुनिया में शांति स्थापना के प्रयास सफल होंगे। वर्तमान उथल-पुथल पुरानी और जर्जर व्यवस्थाओं को ढहाने के लिए है ताकि एक नई, अधिक पारदर्शी और तकनीक-आधारित विश्व व्यवस्था का जन्म हो सके।

मानवता के लिए ब्राहमांड का संदेश- परिवर्तन ही शाश्वत है, और जो राष्ट्र या व्यक्ति इस ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ तालमेल बिठाएगा, वही भविष्य में नेतृत्व करेगा।

(*नोट -उक्त लेख ज्योतिषीय तथ्यो के आधार पर लिखा गया है जो सिर्फ सूचनात्मक है जो किसी प्रकार का दावा नही करता है। संपादक या किसी अन्य का सहमत होना जरूरी नही है)