भोपाल में मंत्री परिषद की बैठक: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता को मंजूरी, इस्लामनगर में लिया ऐतिहासिक फैसला
मकडा़ई एक्सप्रेस 24 भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने रविवार को राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्री परिषद की बैठक भोपाल के इस्लामनगर क्षेत्र में हुई। सरकार का कहना है कि 310 साल पहले इसी स्थान से क्षेत्र में अलग-अलग कानूनों की शुरुआत हुई थी, इसलिए यहीं से कानूनी समानता की नई शुरुआत की गई है।
310 साल पुराने इतिहास से जोड़ा फैसला
सरकारी बयान के अनुसार आज से करीब 310 साल पहले 1716 में इस क्षेत्र में शासन और न्याय व्यवस्था में बदलाव हुए थे। उसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस्लामनगर में बैठक कर समान नागरिक संहिता का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून व्यवस्था स्थापित करना है।
समान नागरिक संहिता में क्या-क्या शामिल होगा
1. विवाह और रजिस्ट्रेशन
– किसी भी धर्म का व्यक्ति एक समय में एक से अधिक विवाह नहीं कर सकेगा।
– सभी विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन होगा। बिना रजिस्ट्रेशन के विवाह को कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी।
– विवाह की न्यूनतम आयु लड़कियों के लिए 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष सभी पर समान रूप से लागू होगी।
– विवाह की रीति-रिवाज अपने धर्म के अनुसार किए जा सकेंगे, लेकिन कानूनी प्रावधान एक जैसे रहेंगे।
2. लिव-इन रिलेशनशिप
– लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।
– रजिस्टर्ड लिव-इन पार्टनर को मेंटेनेंस का अधिकार मिलेगा।
– ऐसे संबंध से पैदा हुए बच्चों को वैध माना जाएगा और संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा।
3. तलाक और भरण-पोषण
– तलाक के आधार सभी धर्मों के लिए समान होंगे, जैसे क्रूरता, परित्याग आदि।
– ट्रिपल तलाक और निकाह हलाला जैसी प्रथाओं पर प्रतिबंध रहेगा।
– तलाक के बाद पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण के नियम सभी के लिए एक समान होंगे।
4. संपत्ति और उत्तराधिकार
– पैतृक और स्वअर्जित दोनों तरह की संपत्ति में बेटे और बेटी को बराबर हिस्सा मिलेगा।
– उत्तराधिकार के नियम धर्म के आधार पर अलग नहीं होंगे।
5. गोद लेना और संरक्षकता
– गोद लेने और बच्चों की संरक्षकता के नियम सभी नागरिकों के लिए समान होंगे।
सरकार ने क्या कहा
सरकार का कहना है कि इस कानून से लैंगिक समानता बढ़ेगी और सभी नागरिकों के लिए नियम स्पष्ट होंगे। इससे महिलाओं और बच्चों के अधिकार मजबूत होंगे और कानूनी विवादों में कमी आएगी।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि लोगों के धार्मिक रीति-रिवाज और समारोह पहले की तरह जारी रहेंगे। बदलाव सिर्फ विवाह, तलाक, उत्तराधिकार जैसे कानूनी पहलुओं में होगा।
फिलहाल कानून को लागू करने की विस्तृत रूपरेखा और समय-सीमा सरकार बाद में जारी करेगी।

