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बेटी की सगाई अन्य जाति में करने पर पूर्व विधायक को किया समाज से बहिष्कृत

पूर्व विधायक ने अपनी बेटी की सगाई अन्य जाति में की समाज की पंचायत ने इस पर नाराजगी जताते पूर्व विधायक को समाज से बाहर किया।

मकड़ाई एक्सप्रेस 24 ओडिशा ।प्रदेश के नबरंगपुर जिले से सामाजिक कट्टरता और परंपराओं के टकराव का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ भतरा समाज ने अपने ही समाज के एक रसूखदार व्यक्ति और पूर्व विधायक सदाशिव प्रधानि को परिवार समेत समाज से बाहर (बहिष्कृत) कर दिया है। यह कठोर निर्णय पूर्व विधायक द्वारा अपनी बेटी का रिश्ता दूसरी जाति में तय करने के विरोध में लिया गया है।

क्या है पूरा विवाद ?

पूरा मामला पूर्व विधायक सदाशिव प्रधानि की बेटी की सगाई से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि प्रधानि ने अपनी बेटी का रिश्ता भतरा समाज से बाहर, ब्राह्मण समाज के एक युवक से तय किया है। हाल ही में दोनों की सगाई हुई है और अगले महीने विवाह संपन्न होने वाला है। भतरा समाज के नियमों के अनुसार, समाज से बाहर विवाह करना परंपराओं का उल्लंघन माना जाता है। इसी बात को लेकर समाज के लोग आक्रोशित थे।

महापंचायत में लिया गया सामूहिक निर्णय

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इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए झरिगांव ब्लॉक के धामनागुड़ा स्थित दंतेश्वरी मंदिर परिसर में ‘अखिल भारतीय भतरा विकास परिषद’ की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई। इस बैठक में जिले के 10 ब्लॉकों से समाज के प्रतिनिधि और कार्यकर्ता शामिल हुए। लंबी चर्चा के बाद सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि समाज के नियमों को तोड़ने के कारण सदाशिव प्रधानि और उनके परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।

बहिष्कार के कड़े नियम लागू

परिषद द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अब से भतरा समाज का कोई भी सदस्य प्रधानि परिवार के किसी भी सुख-दुख, उत्सव या सामाजिक कार्यक्रम में शामिल नहीं होगा। समाज ने इसे अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं की रक्षा के लिए उठाया गया कदम बताया है। हालांकि, इस फैसले पर अभी तक पूर्व विधायक या उनके परिवार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

पहले भी हो चुकी है ऐसी कार्रवाई

नबरंगपुर इलाके में यह इस तरह का पहला मामला नहीं है। इससे पहले पूर्व लोकसभा सांसद प्रदीप माझी को भी अंतर्जातीय विवाह के चलते समाज ने 12 वर्षों के लिए बहिष्कृत कर दिया था। इस ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर आधुनिक समाज में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पारंपरिक सामाजिक नियमों के बीच की बहस को तेज कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में भी इस फैसले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं।