मप्र मे भोपाल से ग्वालियर-मुरैना-रतलाम तक फैला गिरोह
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का दुरुपयोग, फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र से निकाले गए क्लेम
फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र से करोड़ों की हेराफेरी
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 भोपाल। मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत करीब ढाई करोड़ रुपये की बीमा ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। भोपाल सीआईडी की जांच में पता चला कि एक संगठित गिरोह ने ग्वालियर, मुरैना, रतलाम समेत कई जिलों में सुनियोजित तरीके से यह फर्जीवाड़ा किया। गिरोह ने आम लोगों को बिना जानकारी के उनके नाम पर बीमा पॉलिसियां जारी कराईं और फिर एक साल के भीतर उन्हें मृत दिखाकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर बीमा कंपनियों से क्लेम की राशि निकाल ली।
बैंक अधिकारी एजेंट और दलाल पर संदेह
विशेष पुलिस महानिदेशक सीआईडी पंकज श्रीवास्तव के अनुसार, यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और पूरी प्रक्रिया को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दे रहा था। नगरीय निकायों से जारी फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों के आधार पर बीमा कंपनियों से भुगतान लिया गया। पुलिस को शक है कि इस नेटवर्क में स्थानीय एजेंटों के साथ-साथ बैंक और दस्तावेज बनाने वाले दलाल भी शामिल हो सकते हैं।
फर्जी खातों के जरिए हुआ लेन-देन
जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि आरोपियों ने विभिन्न बैंकों में फर्जी नाम और पहचान पत्रों के आधार पर सैकड़ों खाते खुलवाए थे। इन्हीं खातों के जरिए बीमा पॉलिसियां खरीदी गईं और क्लेम की राशि भी इन्हीं खातों में ट्रांसफर की गई। इस तरह असली व्यक्ति को बिना पता चले ही उसका नाम इस्तेमाल करके पूरी ठगी को अंजाम दिया गया।
पुलिस अब इन बैंक खातों के लेन-देन और खाता खोलने वाले दस्तावेजों की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कितने लोगों की पहचान का दुरुपयोग हुआ और कितने क्लेम पास हो चुके हैं।
जीवन ज्योति बीमा योजना को बनाया निशाना
गिरोह ने प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना को अपना निशाना बनाया। यह योजना 18 से 50 साल के लोगों के लिए है जिसमें सालाना सिर्फ 436 रुपये का प्रीमियम देकर 2 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर मिलता है। मृत्यु की स्थिति में यह रकम नामित व्यक्ति को मिलती है। कम प्रीमियम और आसान प्रक्रिया होने के कारण यह योजना आम लोगों के बीच लोकप्रिय है, लेकिन इसी का फायदा उठाकर गिरोह ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए कई क्लेम पास करा लिए।
एक परिवार 2-3लोगो की मौत कैसे
पुलिस के अनुसार कई मामलों में एक ही परिवार के दो-तीन सदस्यों की मौत एक ही हफ्ते या महीने में दिखाकर सभी में मृत्यु का कारण ‘प्राकृतिक’ बताया गया। एक ही तारीख और कारण से हुई कई मौतों ने अधिकारियों का शक बढ़ाया और जांच शुरू हुई।
नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस अब इस पूरे संगठित अपराध नेटवर्क को खंगाल रही है। अब तक कई संदिग्धों की पहचान कर ली गई है और गिरफ्तारी की कार्रवाई जारी है। बैंकिंग और बीमा कंपनियों के सिस्टम में मौजूद खामियों की भी जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
अधिकारियों का मानना है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। ऐसे में मध्य प्रदेश के बाहर भी इस नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
बीमा कंपनियों और आम लोगों के लिए चेतावनी
इस मामले ने बीमा कंपनियों के दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने और क्लेम सेटलमेंट के समय और सख्त जांच की जरूरत है। साथ ही आम लोगों को भी सलाह दी गई है कि वे अपनी पहचान और दस्तावेजों को किसी के साथ साझा न करें और समय-समय पर अपने नाम पर जारी पॉलिसियों की जानकारी चेक करते रहें।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें किसी संदिग्ध बीमा पॉलिसी या फर्जी दस्तावेज की जानकारी मिले तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या सीआईडी को सूचित करें।

