harda news : पूर्व सीएचएमओ की कार्यवाही की घोर अनदेखी, पंजीयन निरस्त करने की कार्यवाही रोककर किया जा रहा बचाव !
मकड़ाई समाचार हरदा। मुख्य चिकित्सक एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा मध्य प्रदेश उपचार तथा रुजोपचार संबंधी अधिनियम के तहत 1973 के प्रावधानों के पालन में घोर लापरवाही बरती जा रही है हेड़ा नर्सिंग होम एलआईजी कॉलोनी में अनुभव सर्टिफिकेट के आधार पर सीजर ऑपरेशन कर महिलाओं की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान सिद्ध हो जाने के बाद भी कार्यवाही नहीं कर संरक्षण प्रदान किया जा रहा है।
विजय बजाज बाहेती कॉलोनी ने मंगलवार को जनसुनवाई में इस संबंध में शिकायत कर 2021 में तत्कालीन सीएचएमओ डॉ सुधीर जैसानी द्वारा की गई कार्रवाई से अवगत कराया गया। बावजूद इसके कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। पंजीयन निरस्त करने का अल्टीमेटम तत्कालीन सीएचएमओ डॉ सुधीर जैसानी ने 23 अप्रैल 2021 और 8 जुलाई 2021 को निरीक्षण किया। इस दौरान मापदंड के अनुसार नर्सिंग स्टाफ नहीं पाया और ओटीवी रजिस्टर के निरीक्षण में पाया गया कि सीजर ऑपरेशन किया जा रहा है जबकि हॉस्पिटल में स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं हैं और रेडियोलॉजिस्ट एक्सरे टेक्नीशियन भी नहीं है बायो मेडिकल वेस्ट की अलग रखे जाने हेतु कमरा उपलब्ध नहीं है।
23 अप्रैल 2021 को निरीक्षण के दौरान यह कमियां पाई गई 3 माह बाद जुलाई को निरीक्षण किया गया तो कमियों में कोई सुधार नहीं पाया गया अधिनियम के प्रावधान का मजाक उड़ाया जा रहा है।
जिसको गंभीरता से लेते हुए सीएचएमओ ने अधिनियम में निर्धारित प्रावधानों का हवाला देते हुए पंजीयन निरस्त करने की कार्यवाही का अल्टीमेटम दिया था।
1 माह के भीतर अभ्यावेदन बुलाए गए थे। समय सीमा में अभ्यावेदन नहीं आने पर पंजीयन निरस्त माना जाएगा। इतना ही नहीं पत्र जारी होने के दिनांक से संस्था में कोई भी नया मरीज भर्ती न किया जाए और वर्तमान में भर्ती मरीज को अन्य संस्थानों में स्थानांतरित किया जाए। 8 जुलाई 2021 को जारी आदेश को नजरअंदाज करते हुए मनमानी तरीके से संस्थान को संचालित कर मरीजों की जान से खिलवाड़ करते हुए स्वास्थ्य अधिनियम के प्रावधानों का माखौल उड़ाया जा रहा है।
जांच कराकर एफ आई आर दर्ज कराया जाए
विजय बजाज ने मंगलवार जनसुनवाई में 7 फरवरी को शिकायत कर सारे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर एफ आई आर दर्ज कराने की कार्यवाही की मांग की।श्री बजाज ने बताया कि मामले को गंभीरता से लेकर तत्काल कार्यवाही नहीं की गई तो माननीय न्यायालय की शरण में जाने को बाध्य हो जाऊंगा। महिलाओं की जान और नियमों से खिलवाड़ वर्षों से किया जा रहा है। सीएचएमओ के संज्ञान में पूरा मामला है फिर भी संस्थान के पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई में कोताही बरत कर अपनी भूमिका संदिग्ध कर जांच के दायरे में लाकर खड़ा कर दिया है।

