यूपी में सरकारी नौकरी के लिए जानिए चरित्र सत्यापन के नए नियम
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों में सीधी भर्ती के लिए चरित्र सत्यापन (Character Verification) के नियमों को सख्त कर दिया है। नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम देवराज द्वारा बुधवार, 29 अक्टूबर 2026 को जारी नए शासनादेश के अनुसार, अब हिंसक गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले युवाओं को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। यह नियम सभी सरकारी विभागों, निगमों, परिषदों, विश्वविद्यालयों, स्वायत्त निकायों और स्थानीय निकायों में होने वाली सीधी भर्तियों पर लागू होगा।
हिंसक ‘रिजीम चेंज’ गतिविधियों पर रोक
नए आदेश में सबसे अहम बिंदु ‘रिजीम चेंज’ को लेकर है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे व्यक्ति जो किसी ऐसे संगठन के सदस्य हैं, जिसका घोषित उद्देश्य हिंसात्मक तरीके से समाज की मौजूदा व्यवस्था को बदलना है, उन्हें सरकारी सेवा के लिए अयोग्य माना जाएगा।
यह फैसला हाल ही में हुए कुछ प्रदर्शनों के दौरान बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में ‘सत्ता परिवर्तन’ के नारे लगने के विवाद के बाद आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस पर चेतावनी दी थी कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन जनता के जनादेश से होता है, अराजकता से नहीं।
21 साल की उम्र और 3 साल का नियम
आदेश में एक समय सीमा भी तय की गई है। यदि कोई व्यक्ति 21 साल की उम्र पूरी करने के बाद और चरित्र सत्यापन की तारीख से पिछले 3 साल के भीतर ऐसी किसी हिंसक गतिविधि में भाग लेता है, तो उसे अभी भी उस संगठन में सक्रिय माना जाएगा। हालांकि, अगर इस अवधि में उसके आचरण में सकारात्मक और ठोस बदलाव के प्रमाण मिलते हैं, तो इस पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
राजनीतिक विचारधारा अयोग्यता का आधार नहीं
सरकार ने यह भी साफ किया है कि केवल राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी को अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा। किसी उम्मीदवार के खिलाफ सिर्फ एफआईआर (FIR) दर्ज होना या जांच लंबित होना भी अपने आप में नौकरी से वंचित करने का कारण नहीं बनेगा। बरी हो चुके, समझौते से निपटे मामलों और किशोर न्याय कानून के दायरे वाले मामलों में भी स्वतः अयोग्यता नहीं लगेगी।
प्रोविजनल नियुक्ति और 30 दिन की समय सीमा
नई व्यवस्था के तहत एक बड़ी राहत भी दी गई है।
प्रोविजनल नियुक्ति
अब चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट आने से पहले भी चयनित अभ्यर्थियों को प्रोविजनल (अस्थायी) नियुक्ति पत्र दिया जा सकेगा। हालांकि, संवेदनशील और सुरक्षा से जुड़े पदों पर पूरी जांच के बाद ही नियुक्ति होगी।
30 दिन में रिपोर्ट
पुलिस और LIU (स्थानीय अभिसूचना इकाई) को सत्यापन रिपोर्ट 30 दिन के भीतर नियुक्ति प्राधिकारी को देनी होगी, ताकि भर्ती प्रक्रिया में देरी न हो।
पुराने कर्मचारियों को छूट
पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का दोबारा चरित्र सत्यापन नहीं होगा। जरूरत पड़ने पर केवल उनके पिछले विभाग से रिकॉर्ड मांगा जा सकता है।
यदि बाद में सत्यापन में कोई अभ्यर्थी अयोग्य पाया जाता है या उसने गलत जानकारी दी है, तो उसकी नियुक्ति तुरंत रद्द कर दी जाएगी और कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

