इंदौर: 21 अवैध कॉलोनियां घोषित, खसरे में दर्ज होंगी, खरीदी-बिक्री पर रोक जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
मकडा़ई एक्सप्रेस 24 इंदौर। जिला प्रशासन ने अवैध कॉलोनियों के खिलाफ सख्त अभियान शुरू किया है। इसी कड़ी में शहर में करोड़ों रुपये की जमीन पर विकसित की जा रही 21 कॉलोनियों को अवैध घोषित किया गया है। इन कॉलोनियों को अब राजस्व रिकॉर्ड यानी खसरे में अवैध के रूप में दर्ज किया जाएगा।
क्या होगी कार्रवाई
खरीदी-बिक्री पर रोक
इन 21 कॉलोनियों में अब किसी भी भूखंड की रजिस्ट्री, नामांतरण और खरीदी-बिक्री नहीं हो सकेगी। रजिस्ट्रार कार्यालय को इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं।
नया निर्माण और सुविधाएं बंद
इन कॉलोनियों में अब कोई नया मकान या निर्माण कार्य नहीं किया जा सकेगा। उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इन कॉलोनियों के रहवासियों को नल, बिजली, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं दी जाएंगी।
कानूनी शिकंजा
जिला प्रशासन ने 30 से अधिक भू-स्वामियों और कॉलोनाइजरों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर एफआईआर की कार्रवाई शुरू कर दी है। पहले भी 57 मामलों में एफआईआर के आदेश दिए जा चुके हैं।
क्यों हुई कार्रवाई
प्रशासन के अनुसार ये कॉलोनियां बिना मंजूरी के काटी गई थीं। कई कॉलोनियां सरकारी जमीन, ग्रीन बेल्ट या अर्बन लैंड सीलिंग वाली जमीन पर विकसित की गई हैं। इससे शहर का अनियोजित विकास हो रहा था और रहवासी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रह रहे थे।
पैसा करना होगा वापिस
कलेक्टर ने बैठक में साफ किया है कि अवैध कॉलोनियों में बेचे गए भूखंडों की रजिस्ट्री को शून्य घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और कॉलोनाइजरों को खरीदारों का पैसा वापस करना होगा।
नगर निगम की सख्ती
नगर निगम भी अवैध कॉलोनियों के बाहर चेतावनी बोर्ड लगा रहा है। सिरपुर, बिलावली, गौरी नगर, कबीटखेड़ी जैसे क्षेत्रों में बोर्ड लगाए गए हैं जिनमें लिखा है कि यहां प्लॉट की खरीदी-बिक्री और निर्माण दंडनीय अपराध है।
लोगों के लिए अपील
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि प्लॉट खरीदने से पहले नगर निगम या राजस्व विभाग से उसकी वैधता जरूर जांच लें। बिना सक्षम न्यायालय या अधिकृत अधिकारी के आदेश के केवल प्रशासनिक पत्र पर रजिस्ट्री नहीं रोकी जा सकती, लेकिन अवैध कॉलोनियों के खिलाफ अलग कानूनों के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।
आपत्तियो के कारण अटकी 400 फाइल
फिलहाल इंदौर में 400 से अधिक अवैध कॉलोनियों की फाइलें विभिन्न विभागों की आपत्तियों के कारण अटकी हुई हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि नियोजित विकास और नियमों के पालन के लिए यह कदम जरूरी है।

