स्टूडेंट हब भंवरकुआ में नशा कारोबार का साया, पढ़ाई छोड़ भटकाव की ओर बढ़ते युवा
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 इंदौर।
इंदौर का भंवरकुआ क्षेत्र वर्षों से शहर का बड़ा स्टूडेंट हब माना जाता रहा है। यहां देश-प्रदेश के अलग-अलग जिलों से हजारों छात्र पढ़ाई के लिए आते हैं, लेकिन हाल के दिनों में इस इलाके में अवैध नशा कारोबार और रंगीन रातों की गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सोशल मिडिया पर आ रहे फोटो विडियो से चिंताजनक
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और स्थानीय चर्चाओं ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है।
शिक्षा के माहौल पर नशे का असर
भंवरकुआ क्षेत्र में कॉलेज, कोचिंग संस्थान, पीजी और हॉस्टल बड़ी संख्या में मौजूद हैं। ऐसे में नशे की आसान उपलब्धता छात्रों के शैक्षणिक माहौल को सीधे प्रभावित कर रही है।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि नशे के कारण कई छात्र पढ़ाई से भटक रहे हैं, कक्षाओं में अनुपस्थिति बढ़ रही है और परीक्षा परिणामों पर भी असर दिखने लगा है।
दूर–दराज से आए छात्रों के लिए बढ़ता खतरा
ग्रामीण और छोटे कस्बों से पढ़ने आए छात्र अक्सर नए शहर के माहौल से अनजान होते हैं। ऐसे में नशे के अड्डे और गलत संगत उन्हें जल्दी अपनी चपेट में ले लेती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नशे की लत लगने से मानसिक तनाव, अवसाद और आत्मविश्वास में कमी जैसी समस्याएं छात्रों में तेजी से बढ़ रही हैं।
रात की रंगीनियत, दिन की तबाही
रात के समय भंवरकुआ क्षेत्र में खुलेआम घूमते युवाओं, तेज संगीत और संदिग्ध गतिविधियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि यह माहौल न सिर्फ छात्रों बल्कि पूरे इलाके की सामाजिक संरचना को नुकसान पहुंचा रहा है। कई अभिभावक अपने बच्चों को इस क्षेत्र में भेजने से पहले अब दो बार सोचने लगे हैं।
अपराध और असुरक्षा की आशंका
नशा कारोबार के साथ-साथ चोरी, मारपीट और अन्य आपराधिक गतिविधियों की आशंका भी बढ़ जाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जहां नशा पनपता है, वहां अपराध का ग्राफ भी ऊपर जाता है, जिसका सीधा असर छात्रों की सुरक्षा और भविष्य पर पड़ता है।
पुलिस कार्रवाई और सवाल
हालांकि पुलिस द्वारा समय-समय पर नशे के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की बात सामने आती रही है, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि ज़मीनी स्तर पर निगरानी और सख्ती अभी भी नाकाफी है।सोशल मीडिया पर सामने आ रहे दृश्य यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि क्या स्टूडेंट हब जैसे संवेदनशील इलाके में और कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
अभिभावकों और नागरिको की भूमिका भी अहम
शिक्षाविदों का कहना है कि केवल पुलिस कार्रवाई से समस्या खत्म नहीं होगी।अभिभावकों को छात्रों से नियमित संवाद रखना होगा।संस्थानों को काउंसलिंग और जागरूकता कार्यक्रम बढ़ाने होंगे।समाज को भी नशे के खिलाफ खुलकर आवाज उठानी होगी। इंदौर शहर में भंवरकुआ जैसे शिक्षा-केंद्रित इलाके में नशा कारोबार केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि पूरे भविष्य की पीढ़ी का सवाल बन चुका है।
यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो पढ़ाई के लिए आए छात्र अपने सपनों की जगह नशे की गिरफ्त में ब्लेक मेलिंग में फंस सकते हैं।

