खंडवा। संयुक्त कृषक संगठन के बैनर तले किसानों ने खंडवा-इंदौर फोरलेन पर चक्काजाम कर दिया। फसल बीमा क्लेम न मिलने और अपर्याप्त राहत राशि को लेकर सैकड़ों किसान छैगांव और देशगांव के बीच बायपास वाले रास्ते पर बैलगाड़ी अड़ाकर धरने पर बैठ गए। महज आधे घंटे के भीतर दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई।
सूचना मिलने के बाद अपर कलेक्टर काशीराम बड़ौले, एसडीएम ऋषि सिंघई, डीएसपी हेडक्वार्टर अनिलसिंह चौहान सहित तहसीलदार मौके पर पहुंचे हैं। किसानों ने देवउठनी ग्यारस का दिन होने के चलते गन्ने के मंडप भी बनाए हैं। अधिकारियों ने लिखित में किसानों को आश्वासन दिया कि अगले एक हफ्ते के अंदर राहत राशि वितरण का काम पूरा किए जाने की बात कही है। प्याज के दामों को लेकर अफसरों ने शासन स्तर का मामला बताया है। कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया, जिले के सभी तहसीलदारों को निर्देश दिए हैं कि जिन किसानों की फसल प्राकृतिक आपदा के कारण प्रभावित हुई है, उनका सर्वे करे। जिले में कुल 16277 किसानों को फसल नुकसान की राशि खाते में जमा करा दी गई है।
पौने दो लाख प्रभावित, 16 हजार को मिली राहत
संयुक्त कृषक संगठन से जुड़े राजेंद्र प्रजापति ने बताया कि खरीफ सीजन की फसलें खराब हो गई हैं। सरकार ने बीमा क्लेम भी अच्छे से नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में पौने दो लाख किसान प्रभावित हैं, लेकिन सरकार ने अभी तक करीब 16 हजार किसानों के खाते में ही राहत राशि जमा कराई है। वह भी जिला प्रशासन आंकड़े दे रहा है। किसानों के खाते में महज 5-5 हजार रुपए डाल रहे हैं। ये कैसा न्याय है? किसान रबी सीजन की बोवनी कैसे कर पाएगा।
हर तहसील मुख्यालय पर किया प्रदर्शन
किसानों ने सरकार को जगाने के लिए फोरलेन के अलावा हर तहसील मुख्यालय पर भी प्रदर्शन किया। उन्होंने देवउठनी ग्यारस पर में गन्ने की झोपड़ी बनाई और किसानों के समर्थन में सरकार को जगाने की अलख जगाई।
देवउठनी पर सरकार को जगाया गन्ने के मंडप बने प्रतीक
देवउठनी ग्यारस के दिन किसानों ने सड़क किनारे गन्ने की झोपड़ियां बनाईं। भगवान के जागरण के साथ उन्होंने सरकार को जगाने की कोशिश की। बुजुर्ग किसानों ने कहा, हर साल वादे सुनते हैं- राहत, बीमा, समर्थन मूल्य, लेकिन हक के नाम पर सिर्फ धोखा मिलता है। हम सरकार की झूठी योजनाओं में नहीं, न्याय में विश्वास करते हैं।
प्रशासन मौके पर, पर किसानों का भरोसा टूटा
अपर कलेक्टर काशीराम बड़ौले, एसडीएम ऋषि सिंघई, डीएसपी अनिल सिंह चौहान और तहसीलदार मौके पर पहुंचे, मगर किसानों ने साफ कहा कि अब आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए।अधिकारियों ने लिखित में सात दिन में राहत राशि वितरण की बात कही, पर किसानों ने चेतावनी दी अगर सात दिन में खेतों तक पैसा नहीं पहुंचा, तो अगला आंदोलन संभाग नहीं, प्रदेश स्तर पर होगा।

